नैनीताल:जनसुनवाई में आयुक्त का ‘नो मर्सी’ मोड!फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर शिकंजा, खेल वॉलंटियर्स के 36 लाख फंसे तो चेतावनी:पैसा दो या एफआईआर झेलो!
आयुक्त/सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कई मामलों में मौके पर ही त्वरित समाधान किया। जनसुनवाई में भूमि विवाद, धोखाधड़ी कर धनराशि हड़पने, अवैध निर्माण, पारिवारिक विवाद, पेयजल आपूर्ति, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, लंबित देयकों के भुगतान और आवासीय कॉलोनियों में कब्जा दिलाने जैसे मामलों पर कार्रवाई की गई।
जनसुनवाई के दौरान उधम सिंह नगर जिले में ओबीसी वर्ग के लोगों द्वारा अनुसूचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जाने की शिकायत को आयुक्त ने गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए। इस मामले में अपर जिलाधिकारी उधम सिंह नगर पंकज उपाध्याय को तलब कर स्पष्ट निर्देश दिए गए कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
38वें राष्ट्रीय खेलों के अंतर्गत हल्द्वानी और भीमताल में आयोजित प्रतियोगिताओं में कार्यरत 85 वॉलंटियर्स का लगभग 36 लाख रुपये का मानदेय एक वर्ष से लंबित होने पर आयुक्त ने संबंधित कंपनी को 14 फरवरी तक शत-प्रतिशत भुगतान करने के निर्देश दिए। भुगतान न होने की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराने के भी आदेश दिए गए। कंपनी प्रतिनिधि द्वारा आंशिक भुगतान की समय-सीमा लिखित रूप में देने के बाद आयुक्त ने कंपनी के एमडी को एक सप्ताह के भीतर तलब किया।
विद्युत चोरी की शिकायतों पर आयुक्त ने यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त और नियमित चेकिंग अभियान चलाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
वहीं, खनस्यू तहसील निवासी मुकुल सिंह ऐरी की पेयजल आपूर्ति बंद होने की शिकायत पर आयुक्त के निर्देश पर उसी दिन जलसंस्थान द्वारा लाइन सुचारू कराई गई, जिसकी पुष्टि वीडियोग्राफी के माध्यम से की गई।
रुद्रपुर के दानपुर क्षेत्र में भूमि खरीद के बावजूद कब्जा न मिलने की शिकायत पर उपजिलाधिकारी और तहसीलदार को जांच कर कब्जा दिलाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा खाता-खतौनी में नाम दर्ज कराने, पैतृक संपत्ति में हिस्सा दिलाने, विद्युत एवं पेयजल संयोजन तथा लंबित वेतन भुगतान से जुड़े मामलों का भी समाधान किया गया।
जनसुनवाई के अंत में आयुक्त दीपक रावत ने कहा कि आमजन अपनी समस्याओं का समाधान तहसील एवं उपजिलाधिकारी स्तर पर कराएं और वहां समाधान न होने पर उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाएं। उन्होंने जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसमस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए।