Sep 19, 2026 Login

हल्द्वानीः पंचतत्व में विलीन हुए असम के पूर्व डीजीपी बीडी खर्कवाल! सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, पूर्वोत्तर में उग्रवाद के दौर में निभाई थी अहम जिम्मेदारी

Haldwani: Former Assam DGP B.D. Kharkwal laid to rest; funeral held with military honors. He had played a pivotal role during the era of insurgency in the Northeast.

हल्द्वानी। उत्तराखंड मूल के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक बीडी खर्कवाल का गुरूवार को निधन हो गया। उन्होंने 90 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पुलिस एवं प्रशासनिक महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने पूर्व डीजीपी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे पुलिस और प्रशासनिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। सेवानिवृत्ति के बाद बीडी खर्कवाल हल्द्वानी के जज फार्म क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। उनका कुमाऊं और हल्द्वानी से लंबे समय से गहरा पारिवारिक एवं प्रशासनिक जुड़ाव रहा। उनके परिवार में पत्नी निर्मला खर्कवाल, एक पुत्र और एक पुत्री हैं। उनके पुत्र अमिताभ खर्कवाल भारतीय डाक सेवा में महानिदेशक के पद से वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त हुए। एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी उनके हल्द्वानी स्थित आवास पर पहुंचे। इस दौरान पुलिस, एसएसबी और सीआरपीएफ के अधिकारियों एवं जवानों ने दिवंगत अधिकारी को ससम्मान अंतिम सलामी दी और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बीडी खर्कवाल के लंबे पुलिस सेवाकाल और उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद करते हुए शोक व्यक्त किया। इस दौरान एसएसबी 57वीं वाहिनी सितारगंज के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत और सीआरपीएफ हल्द्वानी के डिप्टी कमांडेंट अजय प्रताप सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद दिवंगत पूर्व डीजीपी के पार्थिव शरीर को रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट ले जाया गया। यहां परिजनों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

असम में उग्रवाद के दौर में निभाई अहम जिम्मेदारी
बीडी खर्कवाल का पुलिस सेवा का सफर लंबा और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से भरा रहा। असम-मेघालय कैडर के वर्ष 1959 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के चुनौतीपूर्ण दौर में कई महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। असम में उग्रवाद के दौर में कानून.व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई। नवंबर 1990 में असम में ULFA उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन बजरंग शुरू किए जाने के दौरान वह गुवाहाटी में केंद्रीय खुफिया अधिकारियों के साथ अभियान से जुड़े प्रमुख अधिकारियों में शामिल रहे। इसके बाद वर्ष 1993-94 में उन्होंने असम के पुलिस महानिदेशक के रूप में सेवाएं दीं। पुलिस सेवा के दौरान उनके लंबे अनुभव और प्रशासनिक योगदान के कारण असम-मेघालय पुलिस बल में उन्हें सम्मान के साथ याद किया जाता रहा। उन्होंने अपने सेवाकाल में कई अधिकारियों का मार्गदर्शन भी किया।

उत्तराखंड और कुमाऊं से भी रहा गहरा संबंध
असम में महत्वपूर्ण पुलिस जिम्मेदारियां संभालने के साथ ही बीडी खर्कवाल का उत्तराखंड से भी गहरा जुड़ाव रहा। उन्होंने एसएसबी रानीखेत और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), नैनीताल में भी सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने हल्द्वानी को अपना निवास बनाया और यहीं परिवार के साथ रह रहे थे। उनके निधन के बाद पुलिस विभाग के अधिकारियों ने उनके लंबे सेवाकाल, कर्तव्यनिष्ठा और प्रशासनिक योगदान को याद किया। इस दौरान एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल, अपर पुलिस अधीक्षक अमित सैनी, प्रतिसार निरीक्षक हरकेश सिंह, निरीक्षक अभिसूचना ज्ञानेंद्र शर्मा, प्रभारी निरीक्षक मुखानी सुशील जोशी, प्रभारी निरीक्षक हल्द्वानी विजय मेहता, प्रभारी निरीक्षक काठगोदाम जसवीर चौहान, पीआरओ हेमा ऐठानी और एसएसबी ट्रांजिट कैंप हल्द्वानी के एएसआई हरि सिंह सहित नैनीताल पुलिस के अधिकारी और पुलिस बल मौजूद रहे।