‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमः राहुल गांधी ने उठाया पेपर लीक और बेरोजगारी का मुद्दा! बोले- 7.5 करोड़ युवाओं का भविष्य प्रभावित, व्यवस्था में बदलाव जरूरी! रिया थापा के पिता ने सुनाई दर्दभरी कहानी
देहरादून। उत्तराखंड में आयोजित "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों, छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद किया। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में पहुंचे विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं का उत्साह बताता है कि देश का भविष्य जागरूक और संघर्षशील है। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने पेपर लीक, बेरोजगारी, सरकारी नौकरियों, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात की। कार्यक्रम की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद छात्रों की बड़ी भागीदारी इस बात का संकेत है कि युवा अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि "युवा ही देश की पहचान हैं और उनके सपनों की रक्षा करना हर सरकार की जिम्मेदारी है।" राहुल गांधी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी केवल छात्र का व्यक्तिगत संघर्ष नहीं होती, बल्कि उसके साथ पूरा परिवार भी इस सफर का हिस्सा बनता है। उन्होंने कहा कि मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए वर्षों तक बचत करते हैं, कोचिंग की फीस भरते हैं, जरूरत पड़ने पर कर्ज तक लेते हैं और अपने सपनों को बच्चों की सफलता से जोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में यदि परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाता है तो केवल छात्र ही नहीं, पूरा परिवार मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक रूप से टूट जाता है। राहुल गांधी ने कहा कि देश में रोजगार के अवसर लगातार सीमित होते जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कमजोर हो गया है और निजी क्षेत्र में भी पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं हैं। कॉरपोरेट क्षेत्र में नौकरियां कम हैं और उद्यमिता को भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में लाखों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी ही सबसे भरोसेमंद विकल्प बचती है। यदि उसी भर्ती प्रक्रिया में पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं तो युवाओं का विश्वास पूरी व्यवस्था से उठने लगता है। राहुल गांधी ने कहा कि देश के करोड़ों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कई वर्षों तक अपनी सामान्य सामाजिक जिंदगी और खुशियों से दूरी बना लेते हैं। वे रोजाना आठ से दस घंटे तक पढ़ाई करते हैं और सफलता के लिए लगातार मेहनत करते हैं। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में पूरा परिवार हर कदम पर उनका साथ देता है। कई परिवार अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करते हैं और बच्चों की शिक्षा के लिए कर्ज तक लेते हैं। इसके बावजूद देश में आज भी अनेक गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक तंगी के कारण अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा नहीं दिला पाते।
10 वर्षों में कई पेपर लीक, 7.5 करोड़ युवाओं को नुकसान
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में दावा किया कि पिछले दस वर्षों में कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिससे करीब साढ़े सात करोड़ युवाओं को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने युवाओं का भरोसा परीक्षा प्रणाली से कमजोर किया है और इसे रोकने के लिए मजबूत एवं पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता है।
रिया थापा को दी श्रद्धांजलि, पिता ने सुनाई दर्दभरी कहानी
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब देहरादून की छात्रा रिया थापा की तस्वीर बड़ी स्क्रीन पर दिखाई गई। कार्यक्रम में राहुल गांधी ने रिया की मौत को अत्यंत दुखद बताते हुए उनके पिता राजेश को मंच पर आमंत्रित किया। रिया के पिता ने मंच से अपनी बेटी के संघर्ष और अंतिम दिनों की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि रिया प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए देर रात तक पढ़ाई करती थी और कई बार रात तीन बजे तक जागकर मेहनत करती थी। उन्होंने कहा कि जिस दिन पेपर लीक की खबर सामने आई, उस दिन रिया बेहद टूट गई थी और लंबे समय तक रोती रही। परिवार ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह इस घटना से गहरे मानसिक आघात में चली गई। कार्यक्रम में रिया के पिता की बातों के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राएं भावुक हो गए और पूरे सभागार में कुछ देर के लिए गंभीर माहौल बन गया।
पेपर लीक आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करेगा: अभिनय सर
कार्यक्रम में शिक्षाविद अभिनय सर ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल वर्तमान अभ्यर्थियों की समस्या नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारों को इस मुद्दे को राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर गंभीरता से लेना होगा। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रभावी कानूनी तथा प्रशासनिक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पेपर लीक की घटनाओं को सामान्य समाचार मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि प्रत्येक मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।