जाति बंधनों को तोड़ नैनीताल में सम्पन्न हुआ अंतरजातीय विवाह, आर्य समाज मंदिर बना सामाजिक बदलाव का साक्षी

Breaking the bonds of caste, an inter-caste marriage took place in Nainital, with the Arya Samaj Temple serving as a witness to this social change.

नैनीताल। आर्य समाज से जुड़े वैदिक सिद्धांतों और सामाजिक समानता के संदेश को आगे बढ़ाते हुए नैनीताल स्थित आर्य समाज मंदिर में एक अंतरजातीय विवाह सादगीपूर्ण एवं वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न कराया गया। इस विवाह ने समाज में फैली जातिगत संकीर्णताओं और आडंबरपूर्ण विवाह परंपराओं के बीच एक सकारात्मक संदेश देने का कार्य किया। पदमपुरी निवासी पंकज कुमार जोशी और गरमपानी निवासी रश्मि आर्या ने आपसी सहमति एवं स्वेच्छा से विवाह का निर्णय लिया। दोनों ने जातिगत बंधनों को दरकिनार करते हुए बिना दहेज, बिना फिजूलखर्ची, बिना बैंड-बाजे और बिना किसी दिखावे के वैदिक विधि से विवाह सम्पन्न किया। आर्य समाज मंदिर में अग्नि के सात फेरे और सप्तपदी की रस्मों के साथ दोनों ने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। आर्य समाज नैनीताल के मंत्री एवं पदाधिकारियों ने इस पहल को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताया। आर्य समाज के सचिव केदार सिंह ने नवदंपति को आशीर्वाद देते हुए कहा कि समाज में समानता, शिक्षा और वैचारिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए ऐसे विवाह प्रेरणा का कार्य करते हैं। आर्य समाज के नियमों और सिद्धांतों के अनुसार विवाह जाति, ऊँच-नीच और सामाजिक भेदभाव से ऊपर माना जाता है। आर्य समाज वैदिक परंपरा के आधार पर विवाह को दो व्यक्तियों का संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व मानता है, न कि दिखावे या आर्थिक बोझ का माध्यम। इसी कारण आर्य समाज में अंतरजातीय विवाह, दहेज प्रथा का विरोध, सादगीपूर्ण विवाह और स्त्री-पुरुष समानता को विशेष महत्व दिया जाता है। आर्य समाज के वैवाहिक नियमों के तहत विवाह में दोनों पक्षों की स्वेच्छा आवश्यक मानी जाती है। दहेज, अनावश्यक खर्च और आडंबर का विरोध किया जाता है तथा वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और सप्तपदी के माध्यम से विवाह सम्पन्न कराया जाता है। सामाजिक सुधार और समानता की भावना को बढ़ावा देना भी आर्य समाज के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि सामाजिक रूढ़ियों के विरुद्ध एक सकारात्मक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।