BiG BreakinG: संसद में तीन बिल पेश! परिसीमन विधेयक-2026 से बदलेगा चुनावी नक्शा, जानें इस बिल के आने से क्या होगा और क्यों हो रहा है इतना विरोध? लिंक में पढ़ें खास रिपोर्ट

Breaking News: Three bills introduced in Parliament! The Delimitation Bill 2026 will change the electoral map. Learn what this bill will entail and why there is so much opposition. Read the special r

नई दिल्ली। संसद में आज पेश किए गए तीन अहम विधेयकों ने देश की चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करना है। यदि ये प्रस्ताव पारित होते हैं, तो देश में लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 800 से अधिक, यहां तक कि 850 तक पहुंच सकती है। सबसे महत्वपूर्ण विधेयक परिसीमन विधेयक-2026 है, जिसके तहत एक नया परिसीमन आयोग गठित किया जाएगा। यह आयोग नवीनतम जनगणना के आधार पर देशभर में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं और सीटों का बंटवारा तय करेगा। परिसीमन का अर्थ है चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं और संख्या का निर्धारण या पुनर्निर्धारण। यह प्रक्रिया जनसंख्या और उसके घनत्व के आधार पर की जाती है, ताकि हर क्षेत्र में प्रतिनिधित्व संतुलित रहे। उदाहरण के तौर पर किसी शहर या जिले का इलाका पहले एक विशेष लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र में आता था, लेकिन परिसीमन के बाद उसकी सीमा बदल सकती है और वह किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो सकता है।

विधेयक से क्या होंगे बड़े बदलाव?
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या बढ़ाकर 815 की जा सकती है। केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं। वहीं कुल सीटें बढ़कर 850 तक हो सकती हैं। इस दौरान सीटों का बंटवारा नवीनतम जनसंख्या के आधार पर होगा। वहीं महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ होगा। सरकार का कहना है कि वर्तमान में सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर है, जबकि देश की आबादी और सामाजिक.आर्थिक स्थितियों में बड़ा बदलाव आ चुका है।

क्यों हो रहा है विरोध?
विपक्ष इस विधेयक पर सवाल उठा रहा है। दरअसल, 2001 और 2003 के संवैधानिक संशोधनों के बाद सीटों के पुनर्निर्धारण पर 2026 तक रोक लगा दी गई थी। अब सरकार इस रोक को हटाकर नई जनगणना के आधार पर परिसीमन कराना चाहती है। विपक्ष का तर्क है कि इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है? क्या इससे कुछ राज्यों को अधिक और कुछ को कम प्रतिनिधित्व मिलेगा? 

आखिरी बार कब हुआ था परिसीमन?
भारत में अब तक चार बार परिसीमन आयोग गठित किए जा चुके हैं। 1952, 1963, 1973, 2002 में। हालांकि 2002 में केवल सीमाओं में बदलाव हुआ था, सीटों की संख्या में नहीं। सीटों की संख्या का आखिरी बड़ा बदलाव 1971 की जनगणना के आधार पर हुआ था, जिसके बाद लोकसभा सीटें-543 तय हुईं, जो आज तक कायम हैं।

कैसे काम करेगा नया परिसीमन आयोग?
नए विधेयक के तहत गठित आयोग में शामिल होंगे। 
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त या कार्यरत न्यायाधीश (अध्यक्ष)
मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके प्रतिनिधि
संबंधित राज्यों के चुनाव आयुक्त

आयोगः अपने प्रस्ताव सार्वजनिक करेगा, जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगेगा और अंतिम निर्णय गजट में प्रकाशित करेगा। इसके बाद होने वाले चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे।

राज्यों पर क्या होगा असर?
राज्यवार सीटों की संख्या अभी तय नहीं है। यह फैसला 2026 की जनगणना के बाद बने परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा।

हालांकि अनुमान है कि कई राज्यों में 50 प्रतिशत तक सीटों में बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर उन राज्यों में जहां जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। यह विधेयक केवल सीटों के पुनर्गठन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की राजनीति और प्रतिनिधित्व की दिशा को भी बदल सकता है। एक ओर जहां महिलाओं को व्यापक राजनीतिक भागीदारी का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन पर भी नई बहस शुरू होने की संभावना है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि संसद में इस विधेयक पर क्या रुख अपनाया जाता है और यह देश की लोकतांत्रिक संरचना को किस दिशा में ले जाता है।