तराई की सियासतः गदरपुर विधायक अरविन्द पांडेय से मिले भाजपा के दो बड़े चेहरे, मिशन 2027 या सियासी गोलबंदी?

Terai politics: Two prominent BJP leaders met Gadarpur MLA Arvind Pandey, Mission 2027 or political mobilization?

रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर की सियासत इन दिनों खासी गरमाई हुई है। भाजपा के भीतर चल रही हलचल ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सोमवार को पौड़ी गढ़वाल से भाजपा सांसद अनिल बलूनी गदरपुर विधायक अरविन्द पांडेय के संतोष नगर स्थित आवास पहुंचे और उनसे मुलाकात की। इसके अगले ही दिन मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत भी अरविन्द पांडेय से मिलने पहुंचे। लगातार दो बड़े नेताओं के दौरे ने भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। अरविन्द पांडेय के आवास पहुंचने पर दोना नेताओं का कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। बताया जा रहा है कि सांसद अनिल बलूनी ने पहले करीब आधे घंटे तक कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इसके बाद उनकी और विधायक अरविन्द पांडेय की बंद कमरे में करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने इसे शिष्टाचार भेंट करार देते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव मिशन 2027 को लेकर संगठनात्मक चर्चा की गई है।

हालांकि राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को सामान्य शिष्टाचार भेंट मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि भाजपा के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान और अंदरूनी उठापटक के बीच इन मुलाकातों के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। चर्चा इस बात की भी है कि पार्टी के भीतर चल रहे टकराव को खत्म करने और असंतोष को शांत करने को लेकर बातचीत हुई हो सकती है। गौरतलब है कि विधायक अरविन्द पांडेय पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोले हुए हैं। हाल ही में कांग्रेस ने अरविन्द पांडेय का एक वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया था, जिससे भाजपा की काफी किरकिरी हुई थी। इसके बाद पार्टी के भीतर भी हलचल तेज हो गई थी। सूत्रों की मानें तो स्थानीय प्रशासन भी विधायक पांडेय के खिलाफ पुराने मामलों में लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसे लेकर समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अरविन्द पांडेय पार्टी के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने और सहानुभूति जुटाने के लिए लगातार राजनीतिक गोलबंदी में जुटे हैं। यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा के बड़े नेताओं का पांडेय से मिलने का कार्यक्रम चर्चा में आया हो।

कुछ महीने पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हरिद्वार दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी और वरिष्ठ नेता मदन कौशिक का उनके आवास पहुंचने का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद वह दौरा रद्द हो गया था। हालांकि उस दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विशन सिंह चुफाल उनके आवास पहुंचे थे। हाल ही में अरविन्द पांडेय ने देहरादून के एक पत्रकार को पुलिस द्वारा उठाए जाने के मामले में वीडियो जारी कर पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने दावा किया था कि पत्रकार ने उनका इंटरव्यू लिया था, इसलिए कार्रवाई की गई। हालांकि बाद में पत्रकार ने रिहा होने के बाद इन बातों को खारिज करते हुए कहा था कि ऐसा नहीं हो सकता कि इंटरव्यू लेने की वजह से पुलिस ने उन्हें उठाया हो। फिलहाल भाजपा के भीतर लगातार हो रही इन मुलाकातों और बढ़ती सियासी सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि कुमाऊं की राजनीति में अंदरखाने कुछ बड़ा पक रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में भाजपा की यह सियासी हलचल किस करवट बैठती है।