आसमान से बरसी 'आग': तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में लू का तांडव, दो दिनों में 100 से अधिक मौतें
हैदराबाद। दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भीषण गर्मी और जानलेवा लू (हीटवेव) ने हाहाकार मचा रखा है। सूरज के तल्ख तेवर लोगों पर काल बनकर टूट रहे हैं। पिछले 48 घंटों के भीतर दोनों राज्यों में लू की चपेट में आने से 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले शनिवार को तेलंगाना के अलग-अलग हिस्सों में हीटस्ट्रोक के कारण 51 लोगों की जान चली गई, जबकि शुक्रवार को भी 34 लोग इस तपिश की भेंट चढ़ गए थे। दूसरी ओर, पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में भी शनिवार को 16 लोगों की मौत दर्ज की गई है। इस भीषण त्रासदी को देखते हुए तेलंगाना के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने सचिवालय में एक आपातकालीन समीक्षा बैठक की। उन्होंने इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (मुआवजा) देने का बड़ा ऐलान किया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तेलंगाना में सबसे ज्यादा मौतों का तांडव वारंगल जिले में देखने को मिला, जहां एक ही दिन में 23 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा संयुक्त करीमनगर जिले में 11, खम्मम में 7, आदिलाबाद में 5 और नलगोंडा में 5 लोगों ने दम तोड़ दिया। गर्मी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नलगोंडा में एक व्यक्ति की मौत उस वक्त हुई जब वह एक अंतिम संस्कार में शामिल होने गया था। आंध्र प्रदेश में भी शनिवार का दिन भारी रहा, जहां अलग-अलग इलाकों में हीटस्ट्रोक से 16 मौतें हुईं। इनमें से 12 मौतें अकेले एनटीआर, कृष्णा और गुंटूर जिलों में दर्ज की गई हैं। सबसे दुखद नजारा विजयवाड़ा के पंडित नेहरू बस स्टेशन पर देखने को मिला, जहां लू की चपेट में आने से तीन यात्रियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सचिवालय में हुई हाई-लेवल मीटिंग में आपदा प्रबंधन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन मंडलों और गांवों में तापमान सबसे ज्यादा है, वहां तुरंत अलर्ट जारी कर जागरूकता फैलाई जाए। सरकार द्वारा जारी मुख्य दिशा-निर्देश में बस स्टैंड, बाजार, मुख्य सड़कों और मजदूर बाहुल्य क्षेत्रों में ठंडा पानी, छाछ और ओआरएस पैकेट मुफ्त बांटे जाएं। सभी जिला कलेक्टरों को खुद हीटवेव की स्थिति पर नजर रखने और मंडल स्तर के कर्मचारियों को फील्ड पर तैनात रहने के आदेश दिए गए हैं। सनस्ट्रोक का लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मंत्री रेड्डी ने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि इंसानों के साथ-साथ जीवों की रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने हर नागरिक से घरों की छतों और सड़कों पर पानी की टंकियों व मिट्टी के बर्तनों के जरिए पक्षियों और जानवरों के लिए पानी का इंतजाम करने का आग्रह किया है।