अजब-गजब: उत्तराखंड वोटर लिस्ट में 'कुदरत का करिश्मा'! 2 लाख मतदाताओं के माता-पिता नाबालिग, 92 हजार के दादा निकले 'जवान'

Bizarre: A 'miracle of nature' in the Uttarakhand voter list! Parents of 2 lakh voters are minors, while the grandfathers of 92,000 turned out to be 'young'.

देहरादून। उत्तराखंड की मतदाता सूची में एक ऐसा अजब-गजब और हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है, जिसने चुनाव आयोग से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं। आयोग की हालिया जांच रिपोर्ट को अगर सच माना जाए, तो देवभूमि में करीब दो लाख वोटर ऐसे हैं जिनके माता-पिता नाबालिग (15 साल या उससे कम उम्र के) हैं। इतना ही नहीं, करीब 92 हजार मतदाता ऐसे भी हैं, जिनके दादा-दादी या नाना-नानी उनसे महज कुछ ही साल बड़े यानी बिल्कुल 'जवान' हैं। यह हम नहीं, बल्कि खुद चुनाव आयोग के 'सिस्टमैटिक इन्वेंट्री रेक्टिफिकेशन' (SIR) के पहले चरण की स्क्रूटनी रिपोर्ट कह रही है। इस जांच में प्रदेश के कुल 19.04 लाख मतदाताओं के डेटा में भारी विसंगतियां और अकल्पनीय गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं। ऊधमसिंह नगर जिले की रुद्रपुर विधानसभा तो इस मामले में अव्वल रही है, जहां के 89 प्रतिशत मतदाताओं के डेटा में गड़बड़ी मिली है।

एसआईआर की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 1,99,121 मतदाता ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जिनकी उम्र और उनके माता-पिता की उम्र के बीच महज 15 साल या उससे भी कम का फासला दर्ज है। अल्मोड़ा की सल्ट विधानसभा में तो कुल 14,001 में से 3,938 मामले (28 प्रतिशत) ऐसे ही मिले हैं। देहरादून की चकराता विधानसभा में 4,062 और हरिद्वार की खानपुर विधानसभा में 5,359 वोटर इस सूची में शामिल हैं। इस अजब-गजब गड़बड़ी में हरिद्वार (43,418), ऊधमसिंह नगर (38,818) और देहरादून (28,367) सबसे आगे हैं। इसके विपरीत, 1,09,547 मतदाता ऐसे भी हैं, जो अपने माता-पिता से 50 साल से भी अधिक छोटे दर्ज हैं। कागजों पर हुए इस 'चमत्कार' में 92,114 मतदाता ऐसे सामने आए हैं, जिनकी उम्र और उनके दादा-दादी या नाना-नानी की उम्र में 40 वर्ष से भी कम का अंतर है। बागेश्वर जिले की बागेश्वर व कपकोट और अल्मोड़ा की द्वाराहाट विधानसभा में सर्वाधिक 11-11 प्रतिशत मामले ऐसे ही हैं। जिलावार देखें तो ऊधमसिंह नगर में 21,036, हरिद्वार में 14,071 और देहरादून में 13,527 मतदाताओं के दादा कागजों में 'युवा' बने बैठे हैं। राज्य में 2,39,566 ऐसे मतदाता हैं, जिनके डेटा के अनुसार दो सगे भाई-बहनों की उम्र में 9 महीने से भी कम का अंतर है। इसमें हरिद्वार ग्रामीण में 6,187 और खानपुर में 6,457 मामले हैं। हरिद्वार की पिरान कलियर विधानसभा में 8,087 और लक्सर में 4,799 ऐसे मामले हैं जहां एक ही मुखिया के नाम पर 6 या उससे अधिक वोटर दर्ज हैं। देहरादून की रायपुर विधानसभा में 23,555 वोटर (50%) के खुद के नाम में और 17,676 मामलों में रिश्तेदारों के नामों की स्पेलिंग गलत है। डोईवाला में 47% और धर्मपुर में 23,048 मतदाताओं का यही हाल है। चुनाव आयोग की इस डिजिटल स्क्रूटनी में सबसे गंभीर बात यह है कि पूरे प्रदेश में लाखों ऐसे मतदाता हैं, जिन्हें सिस्टम मैप ही नहीं कर पाया है। ऊधमसिंह नगर की रुद्रपुर विधानसभा में सर्वाधिक 42,808 और देहरादून की रायपुर में 17,859 मतदाता 'नॉट मैप्ड' श्रेणी में हैं। आयोग अब इन सभी को नोटिस जारी करने जा रहा है। यदि तय समय में इनका अता-पता या सही दस्तावेज नहीं मिले, तो इन सभी का नाम वोटर लिस्ट से हमेशा के लिए काट दिया जाएगा।

इन बड़े जिलों में मिली सबसे अधिक गड़बड़ी (मुख्य आंकड़े):
जिला    कुल  मतदाता      गड़बड़ी वाले मतदाता       प्रतिशत
देहरादून      11,90,805        3,95,868                   33%
हरिद्वार    12,46,219            3,90,312                  31%
ऊधमसिंह नगर 11,55,672   3,36,164                   29%
नैनीताल    6,93,325           1,88,054                    27%
टिहरी    4,63,628              1,04,402                    23%
पौड़ी    5,03,468               1,05,945                     21%