नैनीताल:मॉल रोड पर नो हॉर्न नियम पर उठे सवाल,भीड़ में बिना हॉर्न हादसे का खतरा, मॉल रोड के नियम पर विधायक सरिता आर्या का बड़ा बयान,डीएम को दिया ज्ञापन
नैनीताल। नैनीताल के मॉल रोड को नो हॉर्न जोन घोषित किए जाने के फैसले पर अब जनप्रतिनिधियों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। क्षेत्रीय विधायक सरिता आर्या ने इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में यह निर्णय आम लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा है।
विधायक सरिता आर्या ने कहा कि मॉल रोड पर हॉर्न बजाने पर रोक को लेकर उन्हें लगातार स्थानीय लोगों की शिकायतें मिल रही थीं। उन्होंने स्वयं भी इस व्यवस्था का अनुभव किया। उनके अनुसार लोअर मॉल रोड पर निर्माण कार्य चलने के कारण इस समय पूरा यातायात अपर मॉल रोड से संचालित हो रहा है। इसी मार्ग का उपयोग वाहन, पर्यटक और स्थानीय लोग पैदल आवाजाही के लिए भी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई लोग कानों में हेडफोन लगाए चलते हैं, जिससे उन्हें पीछे से आने वाले वाहनों का पता नहीं चल पाता। सड़क भी संकरी है, ऐसे में कई बार हॉर्न बजाना सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक हो जाता है। बिना हॉर्न के लोगों को रास्ते से हटाना मुश्किल हो रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
सरिता आर्या ने कहा कि हाई कोर्ट परिसर के आसपास नो हॉर्न जोन बनाए जाने का सभी लोग सम्मान करते हैं, लेकिन पूरे मॉल रोड पर हॉर्न बजाने पर प्रतिबंध लगाने का कोई ठोस औचित्य उन्हें समझ नहीं आता। उन्होंने कहा कि जनहित और मानवीय दृष्टिकोण को देखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर इस आदेश को वापस लेने की मांग की गई है।
वहीं जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि नगरवासियों का भी सुझाव है कि मॉल रोड पर नो हॉर्न व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी तब लागू किया जाए, जब लोअर मॉल रोड का सुधार कार्य पर्याप्त रूप से पूरा हो जाए। उन्होंने बताया कि सड़क के ट्रीटमेंट और रेस्टोरेशन के लिए आवश्यक बजट की व्यवस्था की जा चुकी है। हालांकि मानसून के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है, फिर भी लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को उपलब्ध कार्य अवधि में तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम ने कहा कि प्रशासन की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि यातायात व्यवस्था और सुरक्षा दोनों को संतुलित रखते हुए उचित समाधान निकाला जा सके।