संभल में बुर्का पहनकर कांवड़' लाने का ऐलान,एसडीएम कोर्ट का कड़ा रुख, पति-पत्नी को कारण बताओ नोटिस जारी
संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक अनोखी और विवादित कांवड़ यात्रा की घोषणा के बाद प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। मुस्लिम महिला तमन्ना मलिक द्वारा इस बार भी 'बुर्का पहनकर' कांवड़ लाने के ऐलान पर संभल की उपजिलाधिकारी कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। इलाके में शांति व्यवस्था और कानून-व्यवस्था भंग होने की गंभीर आशंका को देखते हुए एसडीएम कोर्ट ने तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में मुस्लिम महिला तमन्ना मलिक द्वारा बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा निकालने की घोषणा के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के मद्देनजर एसडीएम कोर्ट ने तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। साथ ही संभावित शांति भंग की आशंका को देखते हुए दोनों को छह महीने के लिए 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर पाबंद भी किया गया है। प्रशासन के अनुसार, तमन्ना मलिक ने इस वर्ष भी बुर्का पहनकर हरिद्वार से कांवड़ लाने की घोषणा की थी। जानकारी के मुताबिक वह मंगलवार को हरिद्वार के लिए रवाना होने वाली थीं, लेकिन इस घोषणा के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। स्थानीय प्रशासन को आशंका थी कि इस कदम से सामाजिक और सांप्रदायिक माहौल प्रभावित हो सकता है। इसी के मद्देनजर एसडीएम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दोनों को नोटिस जारी किया। नोटिस में तमन्ना मलिक और उनके पति से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वे बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा क्यों करना चाहते हैं और इससे उत्पन्न होने वाली संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति पर उनका क्या पक्ष है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए एहतियात के तौर पर यह कार्रवाई की गई है। दरअसल, तमन्ना मलिक इससे पहले भी अपनी कांवड़ यात्रा को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं। बीते वर्ष 10 फरवरी को वह हरिद्वार पहुंची थीं, जहां हर की पैड़ी से पवित्र गंगाजल लेकर उन्होंने पैदल कांवड़ यात्रा शुरू की थी। करीब पांच दिनों की यात्रा के बाद महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने संभल स्थित नैमिषारण्य प्राचीन क्षेमनाथ तीर्थ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। उस समय उनकी यह यात्रा काफी चर्चा का विषय बनी थी। तमन्ना मलिक का कहना है कि हिंदू धार्मिक परंपरा के अनुसार कांवड़ यात्रा का "जोड़ा" पूरा करना आवश्यक माना जाता है। इसी मान्यता के चलते उन्होंने इस वर्ष भी हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करने की इच्छा जताई थी। हालांकि इस बार उनकी घोषणा के बाद प्रशासन ने संभावित संवेदनशीलता को देखते हुए पहले ही एहतियाती कदम उठा लिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्था पर टिप्पणी नहीं है, बल्कि केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी गतिविधि से सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका होती है तो प्रशासन के पास एहतियाती कार्रवाई करने का अधिकार और दायित्व दोनों होते हैं। फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजरें एसडीएम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। अब तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत तय करेगी कि आगे इस मामले में क्या कदम उठाए जाएंगे। यह मामला एक बार फिर धार्मिक आस्था, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, प्रशासन ने साफ किया है कि जिले में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से सख्ती से निपटा जाएगा।