योगमय हुआ बिहार: 'स्वस्थ आयु' के संकल्प के साथ पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में जुटे दिग्गज,स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का बड़ा प्रस्ताव

Bihar Embraces Yoga: Stalwarts Gather at Pataliputra Sports Complex with a Pledge for 'Healthy Longevity'; Health Minister Nishant Kumar Makes a Major Proposal.

आज 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पूरा बिहार योग के रंग में सराबोर नजर आया। भोर की पहली किरण के साथ ही राज्य भर में सामूहिक योगाभ्यास के भव्य कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई। इस वर्ष योग महोत्सव का मुख्य केंद्र राजधानी पटना का पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स रहा, जहाँ राज्य के शीर्ष राजनेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और आम नागरिकों ने एक साथ कदम से कदम मिलाकर योगासनों का अभ्यास किया। जनप्रतिनिधियों की यह सामूहिक उपस्थिति प्रदेश में एक नई और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को साफ तौर पर बयां कर रही थी।

राज्य आयुष समिति द्वारा आयोजित इस वर्ष के योग दिवस को एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रासंगिक विषय (थीम) समर्पित किया गया था-स्वस्थ आयु के लिए योग  थीम का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर बुजुर्गों और अधेड़ उम्र के लोगों में यह संदेश प्रसारित करना है कि बढ़ती उम्र के साथ आने वाली शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों से निपटने में योग एक अचूक और प्राकृतिक औषधि है। कार्यक्रम में मौजूद सभी गणमान्य अतिथियों और योग साधकों ने इस प्राचीन भारतीय पद्धति को केवल एक दिन का उत्सव न मानकर, इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का दृढ़ संकल्प लिया। पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित मुख्य समारोह बेहद गरिमामयी रहा। इस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार चौधरी ने विशेष रूप से शिरकत की और विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने की। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, केंद्रीय मंत्री राम नाथ ठाकुर, सांसद रविशंकर प्रसाद तथा विधायक संजय गुप्ता भी मंच पर सक्रिय रूप से सहभागिता करते नजर आए। योगाभ्यास सत्र के समापन के बाद, मीडिया और जनसमूह को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने योग के महत्व पर विशेष बल दिया और एक दूरदर्शी मांग सामने रखी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा "योग केवल शरीर को मोड़ने का नाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक संपूर्ण कला है। मैं राज्य और केंद्र सरकार से यह विशेष आग्रह करूँगा कि हमारे विद्यालयों के पाठ्यक्रम में योग को एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए। स्कूलों में इसकी व्यवस्थित और नियमित क्लासेस शुरू होना बेहद जरूरी है। यदि हमारे छात्र शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे, तो उनका मन पढ़ाई में और अधिक एकाग्रता के साथ लगेगा।

राजधानी पटना के मुख्य आयोजन के अलावा, राज्य आयुष समिति के कुशल मार्गदर्शन में पूरे प्रदेश में योग की लहर देखी गई। लोक भवन और उच्च न्यायालय परिसर सहित बिहार के सभी जिला मुख्यालयों और आयुष स्वास्थ्य संस्थानों में विशाल सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। इसी कड़ी में एक बेहद शांत और आध्यात्मिक कार्यक्रम बिहार विधानसभा परिषद स्थित औषधीय वाटिका में देखने को मिला। यहाँ ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा एक विशेष राजयोग ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने भाग लिया और आंतरिक शांति व मानसिक स्वास्थ्य के लिए ध्यान की महत्ता को रेखांकित किया। इस वर्ष के योग महापर्व ने बिहार के नागरिकों को एक बार फिर अपनी समृद्ध प्राचीन विरासत पर गर्व करने और निरोगी काया की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। गाँव से लेकर शहर तक, लोगों में योग के प्रति अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। राजनीतिक और सामाजिक मतभेदों को भुलाकर जनप्रतिनिधियों का एक मंच पर आना आम जनता के बीच योग के महत्व को और अधिक गहराई से स्थापित कर गया। आज के इस सफल आयोजन से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि योग अब बिहार में केवल एक वार्षिक अभ्यास बनकर नहीं रह गया है, बल्कि यह सूबे की एक नई, ऊर्जावान और स्वस्थ जीवनशैली का मजबूत आधार बन रहा है।