BIG BREAKING: बदरीनाथ धाम के पास कंचनगंगा क्षेत्र में टूटा ग्लेशियर! वीडियो वायरल, कोई नुकसान नहीं! प्रशासन अलर्ट

BIG BREAKING: Glacier breaks in Kanchenjunga area near Badrinath shrine! Video goes viral, no casualties reported! Administration on alert

चमोली। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के निकट स्थित कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने की घटना हुई है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र से भारी मात्रा में बर्फ का हिस्सा टूटकर तेजी से नीचे की ओर खिसक रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। चमोली पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कंचनगंगा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिली थी, लेकिन इससे किसी भी तरह की क्षति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील हिमालयी जोन में आता है, जहां हर वर्ष मौसम में बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण ग्लेशियर धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकते रहते हैं। एसपी पंवार ने स्पष्ट किया कि यह कोई असामान्य घटना नहीं है। उन्होंने बताया कि हर साल कंचनगंगा ग्लेशियर धीरे-धीरे नीचे आता है और एक निश्चित क्षेत्र में जाकर स्थिर हो जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। विशेषज्ञों के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्रों में दिन के समय तेज धूप और रात में अचानक तापमान गिरने से बर्फ की परतों में दरारें पड़ जाती हैं। यही दरारें धीरे-धीरे बड़े हिस्से को कमजोर कर देती हैं, जिससे ग्लेशियर का हिस्सा खिसकने लगता है। गर्मी बढ़ने के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ के तेजी से पिघलने और संरचनात्मक बदलाव के चलते इस तरह की घटनाएं सामान्य रूप से सामने आती रहती हैं।

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में भी बदरीनाथ धाम के पास कंचनगंगा क्षेत्र में इसी तरह ग्लेशियर टूटने की तस्वीरें सामने आई थीं। उस दौरान भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और लोगों में दहशत का माहौल बन गया था। हालांकि तब भी किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली थी और चमोली पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए इसे सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया बताया था। इसके अलावा फरवरी 2025 में बदरीनाथ धाम से आगे भारत.चीन सीमा के निकट माणा क्षेत्र में भीषण हिमस्खलन हुआ था। उस हादसे में निर्माण कार्य में लगे 54 मजदूर बर्फ में दब गए थे। भारतीय सेना और आईटीबीपी ने बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाकर 46 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

आपदा विभाग की पैनी नजर
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में एवलांच और ग्लेशियर खिसकने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी रहती हैं। आपदा प्रबंधन विभाग, सेना, आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन ऐसे संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान का असर हिमालयी ग्लेशियरों पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ सकती है। फिलहाल कंचनगंगा क्षेत्र में स्थिति सामान्य है, लेकिन प्रशासन ने तीर्थयात्रियों, स्थानीय लोगों और सीमांत क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे मौसम और प्रशासनिक अलर्ट को गंभीरता से लें और संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचें।