बांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी-आरजेडी प्रत्याशियों ने भरा पर्चा, नामांकन से ज्यादा 'नाम भूलने' पर चर्चा,ट्रोल हुए संजय सरावगी

Bankipur By-election: BJP and RJD candidates file nomination papers; 'forgetting names' becomes a bigger talking point than the filing itself; Sanjay Sarawgi gets trolled.

पटना। बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे आगामी उपचुनाव को लेकर राजधानी पटना में सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। गुरुवार को पटना समाहरणालय में एनडीए और महागठबंधन, दोनों ही खेमों के दिग्गजों की मौजूदगी में शक्ति प्रदर्शन के साथ नामांकन के पर्चे दाखिल किए गए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी अभिषेक कुमार बंटी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता ने अपने-अपने समर्थकों के भारी हुजूम के साथ नामांकन कराया। हालांकि, इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो गया है, जिसने चुनावी हलचल के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। गुरुवार को पटना समाहरणालय में उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई, जब मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी अपने ही आधिकारिक प्रत्याशी का नाम भूल गए। सरावगी ने एक बार नहीं, बल्कि दो बार प्रत्याशी अभिषेक कुमार बंटी की जगह 'आशीष सिन्हा' का नाम ले लिया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वह बांकीपुर विधानसभा से प्रत्याशी आशीष सिन्हा के नामांकन में आए हैं। हालांकि, जल्द ही उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने इसे सुधारा, लेकिन तब तक तीर कमान से छूट चुका था। अब सोशल मीडिया पर टोलर्स उनके इस वीडियो को शेयर कर मजे ले रहे हैं और लिख रहे हैं कि 'हद है, प्रदेश अध्यक्ष को अपने ही उम्मीदवार का नाम याद नहीं!'

दरअसल, आशीष सिन्हा कुम्हरार विधानसभा सीट के पूर्व विधायक अरुण कुमार सिन्हा के बेटे हैं। टिकट बंटवारे से ठीक पहले तक सियासी गलियारों में बांकीपुर सीट से आशीष सिन्हा का नाम सबसे आगे चल रहा था। लेकिन आखिरी वक्त में भाजपा आलाकमान ने चौंकाते हुए अभिषेक कुमार बंटी के नाम पर मुहर लगा दी। माना जा रहा है कि इसी असमंजस के कारण प्रदेश अध्यक्ष की जुबान फिसल गई। इस चूक को छोड़ दें तो भाजपा खेमे में जबरदस्त उत्साह देखा गया। नामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "अभिषेक कुमार बंटी एक बेहद साधारण कार्यकर्ता हैं। यह सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी में ही संभव है, जहां जमीन से जुड़े एक छोटे से कार्यकर्ता को भी संगठन और राजनीति में इतना बड़ा दायित्व मिल जाता है। विपक्ष के किसी भी दल में सामान्य कार्यकर्ताओं को ऐसा अवसर कभी नहीं मिलता। नामांकन के दौरान अभिषेक कुमार बंटी के साथ जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, सांसद रविशंकर प्रसाद और शाम्भवी चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेता एकजुटता दिखाने पहुंचे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि पिछली बार की तरह इस बार भी बांकीपुर की जनता का आशीर्वाद भाजपा के साथ है और पार्टी प्रचंड बहुमत से यह सीट जीतने जा रही है। उम्मीदवार अभिषेक ने भी बांकीपुर की जनता को नमन करते हुए जीत के लिए साथ मांगा। दूसरी तरफ, महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रत्याशी रेखा गुप्ता ने भी गुरुवार को पूरे दलबल के साथ अपना नामांकन पर्चा दाखिल कर दिया। नामांकन से पहले रेखा गुप्ता राजद प्रदेश कार्यालय में आयोजित 'आशीष यात्रा' (आशीर्वाद यात्रा) कार्यक्रम में शामिल हुईं, जहां महागठबंधन के शीर्ष नेताओं ने उनके पक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, कांग्रेस के प्रवक्ता राजेश राठौर और भाकपा माले के नेता शाहिद समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर राजद प्रत्याशी को अपना पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है। पर्चा भरने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज रेखा गुप्ता ने कहा, "बांकीपुर की महान जनता ने हमें अपना आशीर्वाद दे दिया है। हमारी जीत सौ फीसदी तय है।" राजद नेताओं ने भी दावा किया कि महागठबंधन की एकजुटता के सामने एनडीए टिक नहीं पाएगा। बांकीपुर के इस रण में अब मुकाबला बेहद दिलचस्प हो चुका है। एक तरफ जहां भाजपा अपने 'काडर और संगठन' के भरोसे किला बचाने उतरी है, वहीं राजद महागठबंधन के 'एकजुट वोट बैंक' के सहारे उलटफेर करने की तैयारी में है। देखना होगा कि जनता का असली आशीर्वाद किसे मिलता है।