बिग ब्रेकिंगः यूपी में छिड़ा बड़ा घमासान! अब सीएम योगी के समर्थन में जीएसटी डिप्टी कमिश्नर ने दिया इस्तीफा, कहा- और बर्दाश्त नहीं...

Big Breaking: A major uproar has erupted in Uttar Pradesh! The GST Deputy Commissioner has resigned in support of CM Yogi, saying, "I can't tolerate this anymore..."

लखनऊ। यूपी में यूजीसी और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे को लेकर घमासान मचा हुआ है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में और यूजीसी के नए नियमों के विरोध में जहां सोमवार, 26 जनवरी को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं आज मंगलवार को शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी के विरोध में राज्यकर विभाग, अयोध्या संभाग में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दो पन्नों का इस्तीफा राज्यपाल को भेजा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में यह निर्णय लेने की बात कही है। प्रशांत कुमार सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रदेश के मुखिया हैं और उनका अपमान किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश का वह नमक खाते हैं और जहां से उन्हें वेतन मिलता है, वे उसी प्रदेश और उसके नेतृत्व के साथ खड़े हैं। इस्तीफे में डिप्टी कमिश्नर ने यह भी उल्लेख किया है कि शंकराचार्य की टिप्पणी से वह पिछले तीन दिनों से मानसिक रूप से आहत थे। इसी मानसिक पीड़ा के कारण उन्होंने यह कठोर फैसला लिया। उनका कहना है कि यह निर्णय किसी दबाव में नहीं लिया गया है, बल्कि आत्मसम्मान और अपने विचारों के आधार पर लिया गया है। 

पत्नी से फोन पर बात करते-करते रो पड़े डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार
इस्तीफा देने के बाद जब उन्होंने पत्नी को फोन किया तो खुद को संभाल नहीं पाए। बातचीत के दौरान उनकी आवाज भर आई और वे फफक-फफक कर रो पड़े। पत्नी से उन्होंने सिर्फ इतना कहा हां, हैलो... मैंने इस्तीफा दे दिया है। अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा। प्रशांत कुमार सिंह ने पत्नी से बातचीत में कहा कि वे दो रात से ठीक से सो नहीं पाए थे। मन बेहद व्यथित था। उन्होंने कहा, जिसका नमक खाते हैं, उसका सिला अदा करना चाहिए। मैं उसी प्रदेश से वेतन लेता हूं, उसी सरकार के तहत काम करता हूं। अगर उसी नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक बातें हों और मैं चुप रहूं, तो यह मेरे लिए संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी दो बेटियां हैं और वे चाहते हैं कि बच्चे यह देखें कि उनका पिता सही और गलत के बीच खड़ा होने से नहीं डरा। यह फैसला किसी आवेग में नहीं, बल्कि लंबे आत्ममंथन के बाद लिया गया है।