सियासत से अलगः उत्तराखण्ड में राहुल गांधी का बदला अंदाज! ना मोदी, ना धामी! सिर्फ युवा भविष्य पर फोकस, लाखों दिल जीत गए नेता प्रतिपक्ष

Beyond Politics: Rahul Gandhi’s Changed Approach in Uttarakhand! Neither Modi nor Dhami—the focus is solely on the future of the youth; the Leader of the Opposition has won over millions of hearts.

देहरादून। राजधानी देहरादून में आयोजित कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का अंदाज उनके सामान्य राजनीतिक भाषणों से काफी अलग दिखाई दिया। बन्नू स्कूल परिसर में भारी बारिश के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने लगभग पूरा समय शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर केंद्रित रखा। खास बात यह रही कि पूरे संबोधन के दौरान उन्होंने न तो भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोला, न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया और न ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान या उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का उल्लेख किया। कार्यक्रम का स्वर पूरी तरह छात्रों के संवाद और उनकी समस्याओं पर केंद्रित रहा। इससे यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दी कि कांग्रेस फिलहाल शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना चाहती है। गौरतलब है कि देहरादून में लगातार हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र, अभिभावक और युवा कार्यक्रम में पहुंचे। मंच पर पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने पारंपरिक राजनीतिक भाषण देने के बजाय छात्रों से बातचीत को प्राथमिकता दी। उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों को मंच पर बुलाकर उनके अनुभव सुने। छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक, बेरोजगारी और लंबे समय तक चलने वाली चयन प्रक्रिया से जुड़ी अपनी परेशानियां साझा कीं। कार्यक्रम का माहौल किसी चुनावी रैली से अधिक एक खुली चर्चा जैसा दिखाई दिया, जहां युवाओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि देश के करोड़ों युवा वर्षों तक कठिन मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उनके साथ पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से जुड़ा रहता है। ऐसे में जब किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीदें टूट जाती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और समयबद्ध परीक्षाएं सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। राहुल गांधी ने विभिन्न आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है और इस व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने स्वयं कम बोलते हुए छात्रों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों को अधिक समय दिया। उन्होंने युवाओं से पूछा कि भर्ती परीक्षाओं और रोजगार की प्रक्रिया में उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों ने तैयारी के लंबे समय, कोचिंग पर होने वाले भारी खर्च, परीक्षा स्थगित होने, परिणामों में देरी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से होने वाली मानसिक परेशानी का उल्लेख किया। राहुल गांधी ने कहा कि इन समस्याओं को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं बल्कि युवाओं के जीवन से जुड़े वास्तविक संकट के रूप में देखा जाना चाहिए। कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब राहुल गांधी ने उस छात्रा के परिजनों से मुलाकात की, जिसने नीट परीक्षा के बाद आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने परिवार की पीड़ा को सुना और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मानसिक दबाव पर चिंता व्यक्त की। परिवार के सदस्यों ने छात्रा की तैयारी, उसके सपनों और परीक्षा से जुड़े तनाव का उल्लेख किया। इस मुलाकात के माध्यम से कांग्रेस ने प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और शिक्षा व्यवस्था के मानवीय पहलुओं को भी चर्चा के केंद्र में रखने का प्रयास किया।

नहीं दिखा राजनीतिक हमला, मुद्दों पर रहा पूरा फोकस
यूं तो राहुल गांधी के अधिकांश सार्वजनिक कार्यक्रमों में केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तीखे राजनीतिक हमले देखने को मिलते रहे हैं। लेकिन देहरादून का यह कार्यक्रम उस दृष्टि से अलग रहा। पूरे संबोधन में उन्होंने किसी राजनीतिक दल का नाम लेकर हमला नहीं किया। न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख किया और न ही किसी केंद्रीय या राज्य सरकार के मंत्री को सीधे निशाने पर लिया। इसके बजाय उन्होंने लगातार छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा की। देहरादून का यह कार्यक्रम कांग्रेस की बदलती राजनीतिक रणनीति का संकेत भी माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से पार्टी लगातार युवाओं, रोजगार, शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग हटकर छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना और उन्हें राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाना कांग्रेस के नए राजनीतिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। यदि आने वाले समय में भी पार्टी इसी प्रकार युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित करती है, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि कांग्रेस अपनी राजनीति को केवल सरकार विरोध तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य जैसे विषयों पर केंद्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।