सावधानः कहीं भारी न पड़ जाए ‘Ghibli’ का शौक! चेहरा चुरा सकता है AI? पहले भी सामने आ चुके हैं कई मामले, फोटो अपलोड़ करने से पहले पढ़ लें ये रिपोर्ट

Be careful: Your passion for 'Ghibli' may prove costly! Can AI steal your face? Many such cases have come to light earlier also, read this report before uploading your photo

इन दिनों सोशल मीडिया पर घिबली (Ghibli) का खुमार चढ़ा हुआ है। सोशल मीडिया ओपन करते ही हर तरफ घिबली स्टाइल में फोटोज दिखने लगते हैं। हर कोई इसका इस्तेमाल करे बिना नहीं रह पा रहा है। नेता से लेकर सेलिब्रिटीज तक हर कोई घिबली स्टाइल में बनी तस्वीरें शेयर कर रहा है। लोग अपनी और अपने बच्चों की एआई-जनरेटेड तस्वीरें धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा को लेकर तमाम सवाल खड़े होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लोग सिर्फ चैटजीपीटी ही नहीं बल्कि कई एआई टूल्स का इस्तेमाल कर अपनी एआई-जनरेटेड तस्वीरें बना रहे हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है ये तस्वीरें कहां स्टोर हो रही हैं और क्या इस ट्रेंड का हिस्सा बनकर बिना सोचे-समझे एआई प्लेटफॉर्म्स पर अपनी तस्वीरें शेयर करना कितना सेफ है?

जानकारों की मानें तो हमें एआई टेक्नोलॉजी को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए और बिना सोचे समझे किसी भी एआई प्लेटफॉर्म में तस्वीरें अपलोड करना आपको मुश्किल में डाल सकता है। कुछ साल पहले Clearview AI नाम की एक कंपनी पर बिना इजाजत सोशल मीडिया और न्यूज वेबसाइट्स से 3 अरब से ज्यादा तस्वीरें चुराने का आरोप लगा था। यह डेटा पुलिस और प्राइवेट कंपनियों को बेचा गया था। यही नहीं मई 2024 में ऑस्ट्रेलिया की Outabox कंपनी का डेटा लीक हुआ, जिसमें 10 लाख से ज्यादा लोगों के फेशियल स्कैन, ड्राइविंग लाइसेंस और पते चोरी हो गए। यह डेटा एक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया, जिससे हजारों लोग पहचान चोरी और साइबर धोखाधड़ी के शिकार हो गए।

इस मामले में साइबर क्राइम सीओ देहरादून अंकुश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि ये ट्रेंड अलग-अलग नाम से जाना जा रहा है। फिल्हाल कोई शिकायत तो नहीं मिली है लेकिन घिबली, गिबली या जिबली के नाम से ट्रेंड के बीच साइबर स्मैक के खतरों को नाकारा नहीं जा सकता है। कई बार डेटा लीक होने की शिकायत सामने आती है तो सबसे पहले सिक्योरिटी फीचर्स की बात सामने आती है। कई बार यदि सिक्योरिटी फीचर्स का इस्तेमाल नहीं करते हैं। फोटो या अन्य जानकारी शेयर करते हैं तो उसका मिस यूज होने का चांस भी रहता है। इसलिए किसी भी ट्रेंड के बीच कभी भी कोई जानकारी या फोटो शेयर व पोस्ट करते है तो देख भाल करके ही करें।

अगर आपको लगता है कि एआई से अपनी तस्वीरें जनरेट करवाना मजेदार है और इसका केवल मनोरंजन के लिए ही इस्तेमाल हो रहा है, तो आपको दोबारा सोचने की जरूरत है। Statista की रिपोर्ट के अनुसार, फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (Facial Recognition Technology) का बाजार 2025 तक 5.73 बिलियन डॉलर और 2031 तक 14.55 बिलियन डॉलर का हो सकता है। मेटा (फेसबुक) और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों पर आरोप लगते रहे हैं कि वे यूजर्स की तस्वीरों का उपयोग अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए करती हैं। PimEyes जैसी वेबसाइट्स किसी भी व्यक्ति की फोटो अपलोड करके उसकी पूरी डिजिटल उपस्थिति (Digital Footprint) निकाल सकती हैं। इसका सीधा मतलब है कि स्टॉकिंग, ब्लैकमेलिंग और साइबर क्राइम के मामले बढ़ सकते हैं।