सुशासन के शिल्पकार बीसी खंडूड़ीः उत्तराखंड की राजनीति में एक युग का अंत! जब संकट में थी भाजपा की साख, तब संभाली कमान! ऐतिहासिक फैसलों ने दिलाई अलग पहचान, पढ़ें खास रिपोर्ट
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी का देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से उत्तराखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूड़ी का उपचार अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के एक स्वर्णिम अध्याय के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
सेना से राजनीति तक अनुशासन और ईमानदारी की मिसाल
1 अक्टूबर 1934 को जन्मे बीसी खंडूड़ी ने भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवा दी और मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उन्हें सक्रिय राजनीति में लेकर आए। जल्द ही वे भाजपा के मजबूत और भरोसेमंद चेहरों में शामिल हो गए।
उत्तराखंड की राजनीति में निर्णायक चेहरा
खंडूड़ी पहली बार 8 मार्च 2007 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। उनके पहले कार्यकाल में पारदर्शिता, सुशासन और भ्रष्टाचार पर सख्ती की नई मिसाल कायम हुई। इसके बाद 11 सितंबर 2011 को वे दोबारा मुख्यमंत्री बने। इसी दौरान ‘खंडूड़ी हैं जरूरी’ का नारा पूरे प्रदेश में गूंजा, जिसने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी।
वो ऐतिहासिक फैसले! जिन्होंने दी अलग पहचान
देश का सबसे सख्त लोकायुक्त बिल लागू किया
सरकारी सेवाओं को समयबद्ध करने का कानून बनाया
तबादला नीति को पारदर्शी बनाया
सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति दी
सैनिकों और पूर्व सैनिक परिवारों के लिए कई योजनाएं शुरू कीं
राष्ट्रीय राजनीति में निभाई अहम भूमिका, उत्तराखण्ड को दी 108 की सौगात
बीसी खंडूड़ी केंद्र सरकार में सतह परिवहन मंत्री रहे। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को तेजी मिली। देशभर में सड़क संपर्क सुधारने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। वहीं उत्तराखंड में 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत भी उनके मुख्यमंत्री रहते हुई। 15 मई 2008 को चिकित्सा, पुलिस और आग जैसी आपात स्थितियों में त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए निःशुल्क, 24x7 सेवा की शुरूआत हुई।
ईमानदार छवि, सादगीपूर्ण जीवन
भुवन चंद खंडूड़ी की सबसे बड़ी पहचान उनकी ईमानदारी रही। राजनीति में जहां अक्सर नेताओं पर आरोप लगते हैं, वहीं खंडूड़ी अपनी साफ-सुथरी छवि के लिए जाने जाते रहे। उन्होंने हमेशा सादगीपूर्ण जीवन जिया और व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी। यही वजह है कि उन्हें विपक्षी दलों के नेता भी सम्मान की दृष्टि से देखते रहे। हालांकि उनका राजनीतिक जीवन पूरी तरह विवादों से अछूता नहीं रहा। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें संगठनात्मक दबाव और राजनीतिक समीकरणों का सामना करना पड़ा। 2009 में लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बावजूद उनकी व्यक्तिगत छवि पर कभी बड़ा दाग नहीं लगा और वे एक सशक्त, ईमानदार नेता के रूप में स्थापित रहे।
जब संकट में थी भाजपा की साख, तब संभाली कमान
उत्तराखंड की राजनीति में मेजर जनरल बीसी खंडूरी का कार्यकाल सुशासन, ईमानदारी और सख्त प्रशासनिक फैसलों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। 8 मार्च 2007 को उन्होंने पहली बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली और 27 जून 2009 तक प्रदेश को नई दिशा देने का काम किया। इसके बाद 11 सितंबर 2011 को भाजपा आलाकमान ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए मुख्यमंत्री बनाया। उस दौर में जब देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन चरम पर था, तब जनरल खंडूरी ने उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त लोकायुक्त बिल पेश कर राजनीतिक हलकों में मिसाल कायम की। इस कानून के दायरे में मुख्यमंत्री को भी शामिल किया गया था। उन्होंने सरकारी सेवाओं को समयबद्ध बनाने के लिए कानून लागू किया ताकि जनता को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। तबादला नीति को पारदर्शी बनाकर उन्होंने सिफारिशी संस्कृति पर रोक लगाने की कोशिश की और साफ संदेश दिया कि काम नहीं तो वेतन नहीं। 2011 में जब भाजपा की छवि संकट में थी, तब ‘खंडूरी है जरूरी’ का नारा पूरे प्रदेश में गूंजा। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2012 विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया, हालांकि वे खुद कोटद्वार सीट से मामूली अंतर से हार गए। बावजूद इसके, जनरल खंडूरी उत्तराखंड में सुशासन की मिसाल बनकर हमेशा याद किए जाएंगे।
देशभर से श्रद्धांजलि, नेताओं ने जताया शोक
भुवन चंद खंडूड़ी के निधन के बाद देशभर में शोक की लहर है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बीसी खंडूड़ी के निधन पर दुख जताया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीसी खंडूड़ी को याद करते हुए लिखा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूडी (सेवानिवृत्त) जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत में उन्होंने बहुमूल्य योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी बीसी खंडूड़ी के निधन पर दुख जताया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने कहा कि उनका निधन बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा एक सैनिक के रूप में जितने शानदार रहे उतने ही वह व्यक्ति के रूप में भी शानदार थे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने खंडूड़ी के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का आकस्मिक निधन प्रदेश और देश के लिए अपूर्णीय क्षति है।
कल हरिद्वार में होगा अंतिम संस्कार
भुवन चंद्र खंडूड़ी का पार्थिव शरीर मैक्स अस्पताल से सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां अंतिम चिकित्सकीय औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद पार्थिव शरीर उनके देहरादून स्थित वसंत विहार आवास पहुंचेगा। बुधवार सुबह 10 बजे अंतिम यात्रा निकलेगी और हरिद्वार में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
एक युग का अंत, लेकिन प्रेरणा हमेशा जिंदा रहेगी
बीसी खंडूड़ी सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी और सुशासन की जीवंत मिसाल थे। उत्तराखंड की राजनीति में उनका नाम हमेशा सम्मान और आदर के साथ लिया जाएगा। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।