लेंसकार्ट के शोरूम्स में बजरंग दल का 'तिलक-कलावा' अभियान: 2 दिन में माफी नहीं मांगी तो देशभर में होगा आंदोलन,सांसद ने जताई नाराजगी
देहरादून। देश की चर्चित आईवियर कंपनी 'लेंसकार्ट' के ड्रेस कोड को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कंपनी के शोरूम्स पर जमकर हंगामा किया। कार्यकर्ताओं ने शोरूम के भीतर जाकर हिंदू कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाया और कलाई पर कलावा बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
हाल ही में यह खबर सामने आई थी कि लेंसकार्ट ने अपने कर्मचारियों के लिए एक नया ड्रेस कोड जारी किया है, जिसमें कथित तौर पर माथे पर तिलक लगाने और कलाई पर कलावा बांधने जैसी धार्मिक पहचान वाली चीजों को पहनने से मना किया गया है। हिंदू संगठनों ने इसे सनातन धर्म की परंपराओं पर प्रहार बताते हुए कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। सोमवार को बजरंग दल के प्रांत मिलन प्रमुख विकास वर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ता चकराता रोड और शहर के एक प्रमुख मॉल स्थित लेंसकार्ट शोरूम में नारेबाजी करते हुए दाखिल हुए। कार्यकर्ताओं ने वहां मौजूद कर्मचारियों का तिलक-पूजन किया। विकास वर्मा ने कहा, "लेंसकार्ट का यह आदेश पूरी तरह निंदनीय है। हमने दून के शोरूम्स में हिंदू कर्मचारियों को तिलक लगाया है और सभी कर्मचारी इसके पक्ष में हैं। कंपनी के मालिक को दो दिन के भीतर अपने इस तुगलकी फरमान के लिए सार्वजनिक माफीनामा भेजना होगा, वरना देशभर में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। हंगामे का वीडियो वायरल होने के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वीडियो को रि-ट्वीट करते हुए इसे 'खुली गुंडागर्दी' करार दिया। संजय सिंह ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इस तरह के जबरन शोरूम में घुसने के कृत्य की आलोचना की है। दूसरी ओर, सूत्रों के हवाले से खबर है कि कंपनी ने इस विवाद पर सफाई देते हुए इसे पुराना आदेश बताया है। बताया जा रहा है कि कंपनी प्रबंधन ने इस गलतफहमी के लिए खेद प्रकट किया है, हालांकि बजरंग दल के कार्यकर्ता लिखित माफीनामे की मांग पर अड़े हुए हैं। फिलहाल, देहरादून के इन इलाकों में तनाव को देखते हुए पुलिस सतर्क है और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ी हुई है।