आवाज खुलासाः तय सीमा से ज्यादा जमीन खरीद का चल रहा खेल, भू कानून फेल! 500 की सीमा, खरीद डाली 2500 वर्गमीटर! आखिर किसने दी मंजूरी? अधिकारियों की भूमिका कटघरे में, लिंक में जानें पूरा मामला

Awaaz Khulasa: Scheme to purchase land beyond the prescribed limit underway; land laws fail! Limit was 500 sq. meters, yet 2,500 sq. meters were purchased! Who granted the approval? Officials under s

नैनीताल। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने राज्य के संसाधनों और जमीनों की सुरक्षा के लिए सख्त भू-कानून लागू करने का दावा किया है। लेकिन नैनीताल जिले के रामगढ़ क्षेत्र से सामने आया एक मामला इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। उत्तराखंड में लागू भू-कानून और पूर्व में लागू भूमि खरीद नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए बाहरी व्यक्तियों को निर्धारित सीमा से कहीं अधिक जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। इतना ही नहीं खरीदी गई जमीन पर नियमों के विपरीत होटल और पर्यटन गतिविधियों का संचालन भी कराया जा रहा है। फिलहाल इन आरोपों की जांच प्रशासनिक स्तर पर शुरू हो गई है।

नैनीताल जिले के रामगढ़ क्षेत्र में दिल्ली निवासी विकास कुमार ने मुख्य सचिव, कुमाऊं आयुक्त, जिलाधिकारी नैनीताल सहित कई अधिकारियों को शिकायत भेजकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार दिल्ली निवासी धर्मवीर मान और उनके परिजनों ने वर्ष 2006 से 2021 के बीच कई रजिस्ट्रियों के माध्यम से लगभग 2503.34 वर्गमीटर भूमि खरीदी, जबकि मानकों के अनुसार उत्तराखंड में बाहरी व्यक्ति अपने परिजनों के साथ संयुक्त रूप से बिना अनुमति के 500 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन नहीं खरीद सकता है। शिकायतकर्ता के अनुसार संबंधित अधिकारियों ने नियमों का पालन कराने के बजाय अवैध तरीके से रजिस्ट्रियां कर दीं। यही नहीं कई शपथपत्रों में पहली बार भूमि खरीदने की जानकारी दी गई, जबकि पहले से भूमि खरीद का रिकॉर्ड मौजूद था। शिकायत में तत्कालीन पटवारी, तहसीलदार, उप निबंधक, दस्तावेज लेखक और अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। आरोप में यहां तक कहा गया है कि एक आवासीय भूमि को बाद में कृषि भूमि के रूप में दर्शाकर दोबारा पंजीकरण कराया गया, जिससे सरकारी स्टाम्प शुल्क और राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। मामला यहीं तक सीमित नहीं है  खरीदी गई भूमि पर कथित रूप से होटल और पर्यटन गतिविधियों के संचालन करने का भी आरोप लगाया गया है।

 

दिल्ली निवासी विकास कुमार ने संबंधित संपत्तियों की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और भविष्य में किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उधर उप निबंधक कार्यालय नैनीताल ने शिकायत को जांच के लिए उप जिलाधिकारी नैनीताल को भेज दिया है। आयुक्त कार्यालय और जिला प्रशासन ने भी शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की है और मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

एक तरफ धामी सरकार उत्तराखंड की जमीनों की सुरक्षा के लिए सख्त भू कानून लागू करने की बात कहती आई है, वहीं दूसरी तरफ धामी सरकार के ही अधिकारी बाहरी लोगों से मिलीभगत करके उत्तराखंड में नियम विरुद्ध जमीन की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। जिसकी जानकारी होने के बाद भी स्थानीय प्रशासन कोई कार्रवाही नहीं करता, बल्कि ऐसे मामले उठाने में या तो सामान्य नागरिक पहल करता है या फिर मीडियाकर्मी। फिलहाल इस मामले को लेकर एसडीएम नैनीताल ने जांच करने के बाद उचित कार्रवाही करने की बात कही है। अब देखना ये खास होगा कि अगर जांच में नियम विरुद्ध खरीदी गयी जमीन और अवैध होटल की गतिविधि पायी जाती है तो क्या प्रशासन स्तर पर कार्रवाही की जाएगी या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।