PM मोदी रात को सोते नहीं, हम इनको चैन से नहीं बैठने देंगे! राहुल गांधी का तीखा हमला, उत्तराखंड की महिला का किया जिक्र
नई दिल्ली। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोगों को अपनी बात रखने से रोक रही है और देश पर अपनी बनाई हुई व्यवस्था थोपना चाहती है। राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से लेकर अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रही उत्तराखंड की एक महिला का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस का काम लोगों को अपनी बात कहने का अवसर देना है। राहुल गांधी ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्र अपनी परेशानी और पीड़ा सामने रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार व्यवस्था के नाम पर लोगों की आवाज को सीमित करना चाहती है। राहुल ने कहा कि देश में एक राष्ट्रीय भावना है और इसका अर्थ यह है कि कुछ लोग अपनी बनाई हुई व्यवस्था पूरे देश पर नहीं थोप सकते। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देने के दौरान एक पुलिसकर्मी ने उनसे सरकार के लोगों को हटाने की बात कही थी। राहुल ने कुछ मीडिया कर्मियों का भी जिक्र किया और कहा कि कई पत्रकार निजी तौर पर मानते हैं कि जो हो रहा है, वह सही नहीं है, लेकिन नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण खुलकर अपनी बात नहीं कह पाते।
उत्तराखंड की महिला का किया उल्लेख
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में मिली उत्तराखंड की एक महिला का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि महिला की बेटी के साथ करीब चार वर्ष पहले उत्तराखंड में दुष्कर्म हुआ और उसकी हत्या कर दी गई। राहुल के अनुसार, महिला अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करते हुए रो रही थी और अपनी बात रखना चाहती थी, लेकिन उसे भी अपनी आवाज उठाने का अवसर नहीं दिया जा रहा था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार और उसकी राजनीतिक विचारधारा ऐसी व्यवस्था देश पर थोपना चाहती है, जो सरकार और कुछ चुनिंदा लोगों के हित में हो। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष का काम लोगों को अपनी बात कहने का अवसर देना और ऐसी व्यवस्था को चुनौती देना है।
मोदी-शाह पर भी साधा निशाना
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उनकी राजनीतिक कोशिशें सरकार को परेशान कर रही हैं और कहा कि प्रधानमंत्री रात में सो नहीं पाते। अमित शाह को लेकर राहुल ने कहा कि पहले उन्हें चाणक्य और सरदार पटेल जैसे नामों से जोड़ा जाता था, लेकिन अब वह संसद भवन में प्रवेश तक नहीं कर पाए। प्रधानमंत्री के मीडिया से संवाद पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री को कभी इस तरह खुलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते देखा गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मीडिया का सामना करने से बचते हैं। राहुल ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा नहीं देते, विपक्ष उन्हें चैन से नहीं बैठने देगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय के अंदर से जानकारी मिलती है और वहां अंदरूनी असंतोष है।
आरएसएस और अदाणी को लेकर आरोप
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरएसएस से जुड़े लोगों को भारत के दर्शन और इतिहास की पर्याप्त समझ नहीं है। राहुल ने कहा कि भारत को समझने के लिए केवल हजारों वर्ष पुराना इतिहास जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भारत को उसके वर्तमान और आज की अभिव्यक्ति के जरिए समझना होगा। उन्होंने कहा कि पहले छोटे कारोबारी, मिठाई विक्रेता, सोनार, लोहार और बनिया समुदाय के लोग आरएसएस से जुड़े थे। राहुल ने आरोप लगाया कि आरएसएस और नोटबंदी जैसी नीतियों से इन्हीं छोटे कारोबारियों को नुकसान हुआ। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आरएसएस का कॉरपोरेटीकरण हो चुका है और मौजूदा संगठन बड़े पूंजीपतियों के हितों के लिए काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर उद्योगपति गौतम अदाणी के हित में काम करने का आरोप भी लगाया।
चीन और सीमा विवाद पर सरकार को घेरा
चीन के मुद्दे पर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चीन ने भारत को अपनी ही जमीन पर पेट्रोलिंग करने से रोक दिया, लेकिन सरकार ने इस बात को दबाने की कोशिश की। उन्होंने गलवां की घटना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत की एक इंच जमीन भी किसी के कब्जे में नहीं है। राहुल ने दावा किया कि सेना की ओर से जमीन पर कब्जे की बात कही गई थी और जब भारतीय सेना ने चीन से बातचीत की तो चीनी पक्ष ने प्रधानमंत्री के बयान का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान देश के हितों के बजाय अपने राजनीतिक ढांचे को मजबूत करने पर है।