उत्तराखण्डः हाईकोर्ट में स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकारों पर सुनवाई! बिना प्रक्रिया हटाने और सामान जब्त करने पर उठे सवाल, याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय
नैनीताल। उत्तराखंड में स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकारों और उनके लिए बने कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर आज सुनवाई हुई। नेशनल हॉकर्स फेडरेशन की ओर से वर्ष 2021 में दायर याचिका में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 के प्रावधानों को सही तरीके से लागू करने, समय-समय पर सर्वे कराने और बिना उचित प्रक्रिया के स्ट्रीट वेंडर्स को हटाने या उनका सामान जब्त न करने की मांग की गई थी। इस मामले के साथ कई अन्य याचिकाएं भी जुड़ी हुई थीं, जिनका कोर्ट ने निस्तारण कर दिया है। वहीं, याचिकाकर्ता को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई की तिथि 3 सप्ताह बाद की नियत की गई है। बता दें कि नेशनल हॉकर्स फेडरेशन द्वारा याचिका दायर कर कहा गया है कि स्ट्रीट वेंडर्स के सर्वे और टाउन वेंडिंग कमेटी यानी ज्टब् के गठन एक्ट के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पहले स्ट्रीट वेंडर्स का सर्वे होना है और इसके बाद टाउन वेंडिंग कमेटी में वेंडर्स के प्रतिनिधियों का निर्वाचन होना है। लेकिन कई जगह चुनाव के बजाय चयन के माध्यम से ज्टब् का गठन किया जा रहा है। सर्वे के दौरान प्रत्येक स्ट्रीट वेंडर की पहचान और उसकी लोकेशन की जियोटैगिंग और फोटोग्राफी की जानी चाहिए। इसके बाद वेंडिंग जोन तय किए जाने हैं। यह प्रक्रिया केवल नैनीताल तक सीमित नहीं है, बल्कि हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार समेत पूरे उत्तराखंड में लागू होनी है। इसके अलावा स्ट्रीट वेंडर्स का सामान हटाने और जब्त करने को लेकर भी याचिका में महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं। कई बार नगर पालिकाओं की कार्रवाई के दौरान फल-सब्जियों जैसे खराब होने वाले सामान को फेंक दिया जाता है, जबकि दूसरे सामान को जब्त कर लिया जाता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट और उसके तहत बने नियमों में जब्त सामान को वापस करने और कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया निर्धारित है। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई करते समय एक्ट और नियमों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। अब याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना है, जिसके बाद कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा।