सिलिंडर पर फिर महंगाई की मार: दिल्ली में ₹942 पहुंची कीमत,सरकार बोली- दुनिया में सबसे सस्ती हमारी गैस,कांग्रेस ने उठाए सवाल

Another price hike for cylinders: Cost reaches ₹942 in Delhi; government claims its gas is the cheapest in the world, while Congress raises questions.

नई दिल्ली। देश में रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में एक बार फिर हुई बढ़ोतरी ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। केंद्र सरकार द्वारा घरेलू एलपीजी सिलिंडर के दामों में 29 रुपये की बढ़ोतरी किए जाने के बाद अब राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 942 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। इस ताजा मूल्यवृद्धि के बाद देश में राजनीतिक और आर्थिक बहस पूरी तरह गरमा गई है। एक तरफ जहां पेट्रोलियम मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय संकट का हवाला देते हुए भारत में गैस को दुनिया में सबसे सस्ता बताया है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकारी तेल कंपनियों के रिकॉर्ड मुनाफे के आंकड़े जारी कर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कीमतों में बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा है कि यह फैसला वैश्विक परिस्थितियों के कारण मजबूरी में लेना पड़ा है। मंत्रालय के मुताबिक, इस समय पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में गहरा संकट चल रहा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य  में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आया है। चूंकि भारत अपनी एलपीजी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए घरेलू कीमतें सीधे तौर पर 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस से जुड़ी होती हैं। आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी का भाव करीब 543 डॉलर प्रति टन था, जो जून 2026 तक आते-आते उछलकर 790 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। यानी महज चार महीनों के भीतर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद सरकार आम उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डाल रही है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अगर घरेलू सिलिंडर को पूरी तरह से बाजार के हवाले छोड़ दिया जाए और वास्तविक लागत पर बेचा जाए, तो आज एक सिलिंडर की कीमत 1600 रुपये से ऊपर होनी चाहिए। लेकिन सरकार और सार्वजनिक तेल कंपनियां भारी नुकसान सहकर भी जनता को राहत दे रही हैं।" सरकार के मुताबिक, इसी भारी सब्सिडी और अंडर-रिकवरी के कारण आज आम उपभोक्ता को सिलिंडर 942 रुपये में मिल पा रहा है। वहीं, 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' के लाभार्थियों को यह सिलिंडर प्रभावी तौर पर केवल 642 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जो इसकी मूल लागत का आधा भी नहीं है। मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य में दावा किया गया है कि वैश्विक मंदी और ऊर्जा संकट के बावजूद भारत में घरेलू गैस अब भी दुनिया के कई प्रमुख देशों और हमारे पड़ोसियों की तुलना में काफी सस्ती है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक भारत में उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलने वाला 642 रुपये का सिलिंडर पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की कीमतों से बेहद कम है। यदि विकसित देशों की बात करें तो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे संपन्न देशों में घरेलू गैस की कीमतें भारत के मुकाबले कई गुना ज्यादा हैं। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के बीच के इस भारी अंतर (अंडर-रिकवरी) का बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां खुद वहन कर रही हैं। पिछले वित्त वर्ष में घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इससे पिछले वर्ष में 41,338 करोड़ रुपये थी। इस घाटे की भरपाई और तेल कंपनियों को वित्तीय संकट से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में 30,000 करोड़ रुपये के विशेष मुआवजे को मंजूरी दी है। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में गंभीर सुरक्षा संकट होने के बाद भी भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं होने दिया। भारतीय नौसेना और रणनीतिक प्रयासों के चलते भारतीय जहाज लगातार कच्चे तेल और एलपीजी लेकर सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचते रहे। इसके अलावा, भारत ने एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी गैस की खरीद बढ़ाई है। साथ ही, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए घरेलू उत्पादन में भी 60 प्रतिशत से ज्यादा की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की गई है, ताकि देश में ईंधन की कोई किल्लत न हो।