Big Breaking: जगन्नाथ रथ यात्रा में मची भगदड़! दो श्रद्धालुओं की मौत की खबर! प्रशासन अलर्ट, पहले ही दिन उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़

Big Breaking: Stampede during Jagannath Rath Yatra! Two devotees reported dead! Administration on alert, hundreds of thousands of devotees gathered on the first day.

पुरी। आस्था, श्रद्धा और उत्साह के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल ओडिशा की विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के पहले ही दिन एक दुखद हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। गुरुवार को पुरी के ऐतिहासिक ग्रैंड रोड (बड़ा डंडा) पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसी दौरान अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें दो लोगों की मौत की खबर सामने आई है। हालांकि प्रशासन ने आधिकारिक रूप से एक मौत की पुष्टि की है। घटना के बाद प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई। जानकारी के अनुसार, भीड़ के अत्यधिक दबाव के कारण कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई। एक व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा, जिसे तत्काल पुरी जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, एक और श्रद्धालु की मौत की खबर भी सामने आई है, लेकिन प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कई अन्य श्रद्धालुओं के घायल और बेहोश होने की भी सूचना है, जिन्हें मौके पर मौजूद चिकित्सा शिविरों और अस्पतालों में प्राथमिक उपचार दिया गया।

लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में शुरू हुई विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा
दूसरी ओर लगातार बारिश और भारी भीड़ के बीच श्री जगन्नाथ रथ यात्रा पूरे धार्मिक वैभव और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हुई। नौ दिनों तक चलने वाली इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत ‘पहंडी’ रस्म से हुई, जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को 12वीं शताब्दी के श्रीमंदिर से भव्य रथों तक लाया गया। घंटियों, शंखनाद, झांझ और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सबसे पहले भगवान विष्णु के दिव्य अस्त्र माने जाने वाले चक्रराज सुदर्शन को मंदिर से बाहर लाकर देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर विराजमान कराया गया। इसके बाद भगवान बलभद्र के विग्रह को उनके ‘तालध्वज’ रथ पर स्थापित किया गया। पारंपरिक ‘शून्य पहंडी’ शैली में देवी सुभद्रा के विग्रह को भी उनके रथ तक पहुंचाया गया। जब अंत में भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर से बाहर लाया गया तो पूरा बड़ा डंडा ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंज उठा। लाखों श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर और जयकारों के साथ अपने आराध्य का स्वागत किया। ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां ओडिसी नर्तकों, लोक कलाकारों और विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने भगवान जगन्नाथ के समक्ष मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।