नैनीताल टोल टैक्स विवाद: नगर पालिका अध्यक्ष की सफाई, लोकल वाहनों से नहीं होगी वसूली, सभासद ने बताया नियमों के खिलाफ! बोर्ड की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता फैसला

Nainital Toll Tax Dispute: Municipal Council Chairperson clarifies that local vehicles will not be charged; a councilor terms the move a violation of rules, noting that such a decision cannot be made

नैनीताल। नैनीताल नगर पालिका द्वारा दोपहिया वाहनों पर टोल टैक्स लागू किए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच अब नगर पालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल ने पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि टोल टैक्स की व्यवस्था पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत लागू की गई है और स्थानीय दोपहिया वाहनों से टोल वसूली का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं, नगर पालिका सभासद मुकेश जोशी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि बोर्ड की अनुमति के बिना ऐसा निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए था।

 

नगर पालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल ने कहा कि टोल टैक्स का टेंडर विधिक राय लेने, प्रशासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने और राज्य सरकार के गजट नोटिफिकेशन के आधार पर जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में स्थानीय बाइक सवारों को रोके जाने की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन यह ठेकेदार की जानकारी के अभाव में हुई गलती थी। इस संबंध में ठेकेदार को तत्काल निर्देश जारी कर दिए गए हैं और विभिन्न टोल प्वाइंट पर स्थानीय लोगों की पहचान के लिए कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है।

पालिका अध्यक्ष ने कहा कि नैनीताल के ऐसे छात्र और युवा, जो पढ़ाई या नौकरी के कारण दूसरे शहरों में रहते हैं और बाहर के नंबर की बाइक लेकर सप्ताहांत या छुट्टियों में घर आते हैं, उनके लिए निशुल्क स्टिकर जारी करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों से टोल वसूली नहीं की जाएगी और उनकी सुविधा के लिए सरल व्यवस्था बनाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय शहर में वाहनों का दबाव कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। उनके अनुसार माल रोड क्षेत्र में लगातार धंसाव की समस्या सामने आ रही है और हाईकोर्ट में भी शहर में वाहनों की संख्या नियंत्रित करने की आवश्यकता पर चिंता व्यक्त की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए दोपहिया वाहनों के अनियंत्रित प्रवेश को भी नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरस्वती खेतवाल ने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर लगाए गए अवरोध हटाकर बड़ी संख्या में बाइक शहर में प्रवेश कर रही थीं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। इसे रोकने के लिए भी यह व्यवस्था लागू की गई है।

 

वहीं, नगर पालिका सभासद मुकेश जोशी ने पूरे मामले में अलग राय रखते हुए कहा कि सभासदों के आंदोलन के बाद इस प्रस्ताव को अगली बोर्ड बैठक तक स्थगित रखने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद टेंडर जारी कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि नगर पालिका अधिनियम की धारा 96 के तहत इस प्रकार का निर्णय बोर्ड की स्वीकृति के बिना नहीं लिया जाना चाहिए।

 

वहीं इस मामले में नैनीताल विधायक सरिता आर्या ने भी नगर पालिका की कार्यप्रणाली और टोल ठेका प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दोपहिया वाहनों से टोल वसूली की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उत्तराखंड के किसी भी जिले से आने वाली निजी बाइक और स्कूटी से टैक्स नहीं लिया जाना चाहिए।उन्होंने ये भी कहा कि जब नगर पालिका के सभासद इस मुद्दे को लेकर धरने पर बैठे थे, तब नगर पालिका अध्यक्ष की ओर से आश्वासन दिया गया था कि इस प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में रखा जाएगा और चर्चा के बाद ही टोल ठेके पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। लेकिन उससे पहले ही प्रशासन के माध्यम से ठेका जारी कर दिया गया।

विधायक ने कहा कि करीब 24 करोड़ रुपये का ठेका दिए जाने के बाद जिस प्रकार निजी बाइक और स्कूटी चालकों से भी 100-100 रुपये की वसूली की शिकायतें सामने आई हैं, वह पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि देश के बड़े-बड़े शहरों में भी टोल प्लाजा पर निजी दोपहिया वाहनों से इस प्रकार टोल नहीं लिया जाता।

सरिता आर्या ने ठेका प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किन परिस्थितियों में यह ठेका दिया गया और इसके पीछे क्या वजह रही, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें यह भी जानकारी मिली है कि ठेके को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं, इसलिए पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शहरी विकास मंत्री द्वारा भी इस मामले में अधिशासी अधिकारी (ईओ) से बातचीत की गई थी, जिसके बाद स्थानीय लोगों से टोल टैक्स नहीं लेने के निर्देश दिए गए। विधायक ने कहा कि उनकी मांग केवल नैनीताल के स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के किसी भी जिले से नैनीताल आने वाले निजी बाइक और स्कूटी चालकों से भी टोल टैक्स नहीं लिया जाना चाहिए।

विधायक ने कहा कि पर्यटन नगरी नैनीताल में ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सुविधा मिले, न कि उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ और परेशानियों का सामना करना पड़े।

मुकेश जोशी ने कहा कि यदि प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई है तो उसे तत्काल सुधारा जाना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि नगर पालिका अधिनियम की धारा 34 के तहत यदि जिला अधिकारी या कुमाऊं आयुक्त को यह महसूस होता है कि इस निर्णय से जनता को परेशानी हो रही है या जनहित प्रभावित हो रहा है, तो वे इस प्रस्ताव को निरस्त करने की कार्रवाई भी कर सकते हैं।

दोपहिया टोल टैक्स को लेकर फिलहाल नगर पालिका प्रशासन और विरोध कर रहे पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। एक ओर नगर पालिका इसे शहर के यातायात प्रबंधन और जनहित से जुड़ा निर्णय बता रही है, जबकि दूसरी ओर जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठन इसकी प्रक्रिया और वैधानिकता पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर प्रशासन और बोर्ड स्तर पर होने वाले फैसलों पर सभी की नजर रहेगी।