मिसाल! बिहार में बेटी के जन्मदिन पर मुखिया ने दान की करोड़ों की जमीन, दर्जनों महादलित परिवारों का पूरा होगा 'अपना घर' का सपना

An Exemplary Act! Village head in Bihar donates land worth crores on his daughter's birthday; the dream of 'owning a home' will come true for dozens of Mahadalit families.

भोजपुर। आज के इस दौर में जहां संपत्ति और जमीन-जायदाद को लेकर खूनी संघर्ष और अदालती मुकदमों की खबरें आम हैं, वहीं बिहार के भोजपुर जिले से मानवता और सामाजिक सरोकार की एक ऐसी अद्भुत मिसाल सामने आई है जिसने सबका दिल जीत लिया है। भोजपुर की सरथुआ पंचायत के मुखिया राकेश सिंह ने अपनी पांच वर्षीय मासूम पुत्री प्रिंसी राज के जन्मदिन को केवल केक काटने और उत्सव मनाने तक सीमित न रखकर, उसे हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना दिया है। मुखिया ने इस पावन मौके पर अपनी निजी स्वामित्व वाली 18 कट्ठा (करोड़ों रुपये मूल्य की) जमीन महादलित और भूमिहीन गरीब परिवारों को आशियाना बनाने के लिए दान कर दी है। मुखिया राकेश सिंह के इस ऐतिहासिक और निस्वार्थ कदम से उन दर्जनों जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर खुशी लौट आई है, जिनके पास वर्षों से रहने के लिए जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा तक मयस्सर नहीं था। इस जमीन के मिलने के बाद अब इन परिवारों का समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और पक्के मकान में रहने का सपना साकार होने जा रहा है।

अपनी इस अनूठी पहल पर विचार साझा करते हुए मुखिया राकेश सिंह ने अत्यंत भावुक होकर कहा किसी भी व्यक्ति और उसके परिवार के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा और सम्मान उसका अपना खुद का घर होता है। यदि मेरी निजी जमीन का एक हिस्सा किसी गरीब परिवार के जीवन में स्थायी खुशहाली और बदलाव ला सकता है, तो एक पिता और एक जनप्रतिनिधि के रूप में मेरे लिए इससे बड़ी खुशी की बात कोई दूसरी नहीं हो सकती। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मुखिया राकेश सिंह का यह कदम कोई राजनीतिक स्टंट नहीं है, बल्कि वे लंबे समय से क्षेत्र में सामाजिक रूप से सक्रिय रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंदों को तत्काल आर्थिक सहायता पहुंचाना, बेसहारा लोगों के लिए भोजन-वस्त्र का प्रबंध करना तथा कड़ाके की ठंड में नियमित रूप से कंबल बांटना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। यही कारण है कि पूरे इलाके में उनकी छवि एक बेहद संवेदनशील और लोकप्रिय जननेता के रूप में स्थापित हो चुकी है। जमीन दान करने के बाद मुखिया राकेश सिंह ने समाज के संपन्न और सक्षम वर्ग से एक मर्मस्पर्शी अपील भी की है। उनका मानना है कि सरकार के भरोसे बैठने के बजाय यदि समाज का हर सक्षम व्यक्ति केवल एक जरूरतमंद परिवार की जिम्मेदारी उठा ले या उसका हाथ थाम ले, तो देश से बेघर होने की समस्या को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से व्यक्तिगत स्वार्थ और संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का आह्वान किया है। पूरी सरथुआ पंचायत समेत पूरे भोजपुर जिले में मुखिया के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है। लोग इसे केवल एक भूखंड का दान नहीं, बल्कि गिरते सामाजिक मूल्यों के बीच मानवता और संवेदनशीलता की जीती-जागती मिसाल मान रहे हैं। इस अनोखे जन्मदिन ने समाज को यह सकारात्मक संदेश दिया है कि वास्तविक खुशी केवल अपनों के बीच जश्न मनाने में नहीं, बल्कि दूसरों के बुझते हुए दीयों में उम्मीद की नई रोशनी जगाने में है।