हीटवेव से निपटने को बनेगा एक्शन प्लान,कक्षाओं में वेंटिलेशन,ओआरएस और दवाओं की उपलब्धता अनिवार्य
देहरादून। उत्तराखंड के स्कूलों में चिलचिलाती गर्मी और लू (हीटवेव) के बढ़ते खतरे को देखते हुए शिक्षा विभाग ने छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं। अब प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नियमित अंतराल पर 'वाटर बेल' (पानी पीने की घंटी) बजेगी। शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने इस संबंध में सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
दरअसल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने पहले ही हीटवेव की चुनौती से निपटने के लिए स्कूलों में वाटर बेल बजाने के निर्देश दिए थे, ताकि बच्चे डिहाइड्रेशन का शिकार न हों। लेकिन मंगलवार को प्रशासन को सूचना मिली कि कई स्कूलों में इस आदेश का पालन नहीं हो रहा है। इस जमीनी लापरवाही का संज्ञान लेते हुए शिक्षा महानिदेशक ने तत्काल निर्देश जारी कर स्पष्ट किया कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षा महानिदेशक द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, अब हर स्कूल को अपना 'हीटवेव एक्शन प्लान' तैयार करना होगा। इसमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है। हर स्कूल में छात्रों के लिए शुद्ध पीने के पानी की व्यवस्था अनिवार्य होगी। साथ ही कक्षाओं में उचित वेंटिलेशन,ओआरएस घोल और जरूरी प्राथमिक चिकित्सा दवाएं रखनी होंगी। यदि गर्मी का प्रकोप बढ़ता है, तो जिला स्तर पर स्कूल के समय में भी बदलाव किया जा सकेगा। तेज धूप के दौरान छात्र-छात्राओं से खेलकूद या अन्य आउटडोर गतिविधियां नहीं कराई जाएंगी। स्कूल की छुट्टी होने के बाद बच्चों को अकेले भेजने के बजाय समूह में घर भेजा जाएगा, ताकि किसी आपात स्थिति या तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल सहयोग मिल सके। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे बच्चों को लू से बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक करें। शिक्षा महानिदेशक ने दो टूक कहा है कि यह आदेश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर स्कूल में इसे धरातल पर उतारना सीईओ की जिम्मेदारी होगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देवभूमि के नौनिहाल इस भीषण गर्मी में सुरक्षित रहकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।