संघर्ष, समर्पण और उत्तराखंडियत की कहानीः हरीश रावत के राजनीतिक सफर पर बनी डॉक्यूमेंट्री का भव्य विमोचन! ग्राम सभा से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक के सफर को किया गया जीवंत प्रस्तुत
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के राजनीतिक जीवन और उत्तराखंडियत की भावना को केंद्र में रखकर बनाई गई एक विशेष डॉक्यूमेंट्री का भव्य विमोचन देहरादून के एक स्थानीय होटल में आयोजित समारोह में किया गया। कार्यक्रम में राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जगत की अनेक नामचीन हस्तियों की मौजूदगी रही। डॉक्यूमेंट्री का विमोचन संयुक्त रूप से पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी और संत हरिबोल चैतन्य महाराज ने किया। डॉक्यूमेंट्री में हरीश रावत के राजनीतिक जीवन की शुरुआत ग्राम सभा स्तर की राजनीति से लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री बनने तक की पूरी यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसमें उनके शुरुआती संघर्ष, बेहद सीमित संसाधनों में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ने की कहानी और कठिन परिस्थितियों में लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणादायक झलक दिखाई गई है।
फिल्म में विशेष रूप से यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार 1980 के दशक में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ चुनाव जीतकर संसद में अपनी मजबूत पहचान बनाई। इसके साथ ही युवा कांग्रेस, सेवा दल और ट्रेड यूनियन आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। डॉक्यूमेंट्री में यह भी दिखाया गया है कि देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का विश्वास और स्नेह किस तरह उन्हें मिला और कैसे उनके मार्गदर्शन ने उनके राजनीतिक जीवन को नई दिशा दी। उत्तराखंड के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद चारधाम यात्रा को पुनः सुचारु कराने में हरीश रावत की भूमिका को भी डॉक्यूमेंट्री में विस्तार से दर्शाया गया है। इसमें यह प्रसंग भी शामिल है कि किस तरह उन्होंने राहुल गांधी के साथ पैदल केदारनाथ यात्रा कर आपदा के बाद प्रदेश में विश्वास बहाली का संदेश दिया। वर्ष 2016 के उत्तराखंड के चर्चित राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री रहते हुए बगावत का सामना करने के बाद न्यायालय के आदेशों से पुनः सत्ता में वापसी की पूरी कहानी को भी फिल्म में प्रमुखता दी गई है। यह हिस्सा दर्शकों के लिए खासा भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा।
इसके अलावा हवाई दुर्घटना में घायल होने के बाद एम्स में उपचार के दौरान भी उनके राजनीतिक दायित्वों के निर्वहन को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद हरीश रावत हमेशा संघर्षशील, सक्रिय और जनभावनाओं से जुड़े नेता रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा सांसद के रूप में हरीश रावत संसद में जीरो आवर के हीरो के रूप में पहचाने जाते थे। कोश्यारी ने दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद बनी आत्मीयता और सद्भाव के कई संस्मरण भी साझा किए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हरीश रावत की जीवन यात्रा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि उनके संघर्ष, अनुभव और उत्तराखंड के प्रति समर्पण का लाभ राज्य को मिलना चाहिए। इस अवसर पर विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, विधायक मनोज तिवारी, ममता राकेश, पूर्व मंत्री सुरेंद्र नेगी, शूरवीर सजवाण सहित सैकड़ों सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र की हस्तियां एवं कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।