पंतनगर विवि के पूर्व कुलपति डॉ. प्रेम लाल गौतम को 'पद्मश्री'; कृषि जगत में दौड़ी खुशी की लहर, गेहूं ब्रीडिंग और किसान अधिकारों के बने मसीहा

Former Vice-Chancellor of Pantnagar University, Dr. Prem Lal Gautam, awarded 'Padma Shri'; wave of joy sweeps through the agricultural community; hailed as a champion of wheat breeding and farmers' r

पंतनगर। देश के सुप्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक, महान शिक्षाविद् और अद्वितीय संस्थान निर्माता डॉ. प्रेम लाल गौतम को राष्ट्रपति द्वारा देश के प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' सम्मान से अलंकृत किया गया है। भारत सरकार ने उन्हें यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान कृषि विज्ञान, जैव विविधता संरक्षण और किसानों के अधिकारों को वैश्विक पटल पर मजबूत करने के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट व दीर्घकालिक योगदान के लिए दिया है। 

गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के पूर्व कुलपति रहे डॉ. गौतम को यह सम्मान मिलने से न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश के कृषि वैज्ञानिक समुदाय और पंतनगर विश्वविद्यालय परिवार में गर्व और हर्ष का माहौल है। वर्तमान में डॉ. गौतम 'डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय' के कुलाधिपति (चांसलर) के रूप में देश को अपनी अमूल्य सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. प्रेम लाल गौतम का नाम भारतीय कृषि अनुसंधान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने 18 जून 2002 से 11 अक्टूबर 2007 तक पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में एक बेहद सफल और ऐतिहासिक कार्यकाल पूरा किया था। उनके कुशल नेतृत्व में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊंचाई मिली। वर्ष 2006 में डॉ. गौतम के ही कार्यकाल में पंतनगर विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद  द्वारा देश का सबसे प्रतिष्ठित 'सरदार पटेल उत्कृष्ट कृषि संस्थान पुरस्कार' प्रदान किया गया था। इस बड़ी उपलब्धि ने विश्वविद्यालय को देश के अग्रणी कृषि शिक्षण संस्थानों की श्रेणी में सबसे ऊपर स्थापित कर दिया था। डॉ. प्रेम लाल गौतम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं प्रजनन के सबसे बड़े विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में अपने करियर की मजबूत नींव रखी थी। इसके बाद उन्होंने रानीचौरी स्थित विश्वविद्यालय के पर्वतीय परिसर में संयुक्त निदेशक (शोध) का महत्वपूर्ण दायित्व भी संभाला।

भारत में कृषि जैव विविधता को बचाने के लिए उन्होंने 'पादप जर्मप्लाज्म पंजीकरण प्रणाली' की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई। इस क्रांतिकारी कदम से देश की पारंपरिक फसलों और बीजों को कानूनी संरक्षण मिला। इसके अतिरिक्त, वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) जैसी सर्वोच्च भूमिकाओं में भी रहे। कृषि क्षेत्र में प्रशासनिक सुधारों की बात करें तो डॉ. गौतम ने 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' तथा 'पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण' के अध्यक्ष के रूप में भी देश को नई दिशा दी। इन पदों पर रहते हुए उन्होंने कानूनन किसानों के हितों की रक्षा की और कॉरपोरेट जगत के सामने भारतीय अन्नदाताओं के पारंपरिक अधिकारों को सुरक्षित किया। पद्मश्री सम्मान मिलने पर देश भर के कृषि वैज्ञानिकों और पंतनगर विवि के मौजूदा अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. गौतम का जीवन और कार्य कृषि अनुसंधान, नवाचार तथा किसानों के कल्याण के प्रति समर्पण का सबसे बड़ा प्रेरणादायक उदाहरण है। उनका यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के युवा शोधकर्ताओं को खेती-किसानी के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।