भारत के स्टील फ्रेम' को सलाम: राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने दी सिविल सेवा दिवस की बधाई,कहा- विकसित भारत के सारथी हैं अधिकारी

A Salute to India's 'Steel Frame': President and PM Modi Extend Civil Services Day Greetings, Stating—Officers Are the Charioteers of a Developed India

नई दिल्ली। देश की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सिविल सेवकों के सम्मान में आज देशभर में 'सिविल सेवा दिवस' उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र निर्माण में अधिकारियों के अतुलनीय योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुशासन को जमीनी स्तर तक पहुँचाने और अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के विकास में सिविल सेवकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि सिविल सेवक संस्थानों को सशक्त बनाने और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से करोड़ों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा, "जैसे-जैसे भारत नई आकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है, आपकी ईमानदारी और सहानुभूति नागरिकों और सरकार के बीच के विश्वास को और मजबूत करेगी।" उन्होंने लोक सेवकों से सार्वजनिक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का आह्वान किया। वही इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिविल सेवकों को 'देश निर्माण की मजबूत कड़ी' बताया। पीएम ने कहा कि यह दिन सुशासन की दिशा में काम करने के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने का अवसर है। उन्होंने कामना की कि देश के अधिकारी नवाचार और करुणा के साथ राष्ट्र की सेवा जारी रखें। गौरतलब है कि पीएम मोदी अक्सर अधिकारियों को 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 'कर्मयोगी' बनने पर जोर देते रहे हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन के साथ विशेषज्ञों का पैनल ‘सिविल सेवाओं की भूमिका और प्रभावशीलता’ पर चर्चा करेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नीतियों को लागू करने और शासन को मजबूत बनाने में लोक सेवकों का समर्पण राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। वहीं, नितिन गडकरी ने सिविल सेवकों की ईमानदारी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत से जनकल्याण के प्रति जनता का विश्वास बढ़ता है। हर साल 21 अप्रैल को मनाया जाने वाला यह दिन उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है जब 1947 में स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित किया था। उन्होंने ही सिविल सेवकों को 'भारत का स्टील फ्रेम' की संज्ञा दी थी। आज यह दिन पुराने संकल्पों को दोहराने और भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने का प्रतीक बन गया है।