सोशल मीडिया पर छाया नन्हा बंदरः मां ने दुत्कारा तो खिलौने में ढूंढने लगा अपनापन! मासूम ‘पंच’ की दर्दभरी कहानी ने लोगों को किया भावुक, जानें क्या है वायरल वीडियो की असल कहानी
नई दिल्ली। यूं तो हर रोज सोशल मीडिया पर लाखों वीडियो वायरल होते रहते हैं, लेकिन कुछ वीडियो और तस्वीरें हर किसी के दिल को छू जाती है। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। ये कहानी एक नन्हे बेबी मंकी की है। जापान के इचिकावा शहर के एक चिड़ियाघर में रहने वाले 7 महीने के जापानी मकाक पंच की मासूम आंखों में झलकती उदासी और फिर धीरे-धीरे लौटती मुस्कान ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया है। छोटी सी उम्र में जिंदगी की बड़ी परीक्षा से गुजरने वाले पंच की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग उसकी कहानी में दर्द भी देख रहे हैं और हिम्मत भी।
इस कहानी में एक तरफ अकेलापन है, तो दूसरी तरफ उम्मीद की चमक भी नजर आती है। यही वजह है कि पंच सिर्फ एक बंदर नहीं, बल्कि संवेदनाओं और अपनापन की मिसाल बन गया है, जिसकी कहानी हर किसी के दिल में खास जगह बना रही है। दरअसल, जुलाई 2025 में जन्मे पंच को उसकी मां ने शुरुआती दिनों में ही स्वीकार नहीं किया। किसी भी शिशु के लिए मां का साथ सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन पंच को ये साया नसीब नहीं हुआ। छोटी सी उम्र में उसे अकेलपन का सामना करना पड़ा। जब मां ने साथ छोड़ दिया, तो जू के स्टाफ ने उसे गोद लेकर उसकी परवरिश शुरू की। हाथ से दूध पिलाया गया, खास देखभाल की गई और उसे सुरक्षित माहौल दिया गया, ताकि वो स्वस्थ और मजबूत बन सके। पंच के अकेलेपन को कम करने के लिए उसे एक खिलौना (टॉय) दिया गया।
धीरे-धीरे वो उसी से लिपटकर बैठने लगा, उसे गले लगाता, साथ लेकर सोता। वो खिलौना उसके लिए सिर्फ खिलौना नहीं, बल्कि सुकून और अपनापन बन गया। जैसे ही पंच और उसके खिलौने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए, लोग भावुक हो गए। #HangInTherePunch जैसे हैशटैग के साथ लोग उसका हौसला बढ़ाने लगे। उसकी मासूमियत ने दुनिया भर से प्यार बटोर लिया। धीरे-धीरे पंच को दूसरे बंदरों से मिलवाया गया। शुरुआत में वो दूरी बनाकर रखता था, लेकिन कुछ ही समय में वह उनके साथ घुल-मिल गया। अब वो अपने झुंड के साथ खेलता, हंसता और आत्मविश्वास से भरा नजर आता है। हांलाकि नया परिवार मिलने के बाद भी पंच अपने प्यारे खिलौने को नहीं भूला। वो अब भी उसे अपने पास रखता है। इस कहानी में एक संदेश और भी है वो है इंसान तो इंसान अब जानवरों में भी इमोशंस खत्म होते जा रहे हैं।