नैनीताल के भीमताल में आस्था का संगमः 12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष महत्व वाला भीमेश्वर धाम! जानें सतयुग में स्थापना की कथा, भीम और पुष्कर की भक्ति से जुड़ा ऐतिहासिक महत्व
नैनीताल। उत्तराखंड को देव भूमि कहा गया है और यहां कण-कण मे शिव निवास करते हैं। ऐसा ही एक मंदिर नैनीताल के भीमताल में भीमेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। 12 ज्योतिलिंगों में महत्व रखने वाला ये भीमेश्वर महादेव मंदिर में हर सावन के महीने में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। दूर-दूर से शिव भक्त यहां आकर जल चढाने के साथ मंन्नतें मांगते है। कहा जाता है कि भीमताल का यह भीमेश्वर मंदिर की स्थापना सतयुग में हुई थी। जब पांण्डव अपना अज्ञात वास के दौरान पहाडों की कंन्दराओं में भटक रहे थे तो उस दौरान भीम ने इस मंन्दिर की स्थापना की थी। कहा जाता है कि जो भी भक्त शिवरात्री और सावन के महीने में सच्चे मन से मन्नत मागता है तो वो जरूर पूरी होती है। नैनीताल के भीमताल में स्थित ये है भीमेश्वर महादेव का मंन्दिर ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व समेटे है। ये भी कहा जाता है कि राजा हरीश चन्द्र यहां आये थे उस वक्त यह स्थल भीमसेन की नगरी के नाम से जाना गया, जो दम्यंति के पिता थे। लेकिन एक बार राजा भीमसेन के दरबार में पुष्कर और नल ये दो भाई आए, जिसमें पुष्कर शिव भक्त थे और राजा भीमसेन से पूछा कि यहां कोई शिव मंन्दिर है। भीमसेन ने छोटा कैलाश के पास शिव मंन्दिर होने की बात कही, जहां रोज पुष्कर पूजा के लिये जाया करते थे, लेकिन एक दिन उनको पूजा के लिये विलंम्ब हो गया और नदी के किनारे बैठ कर पूजा अर्चना करने लगे। कहा कि अगर मेरी भक्ती में शक्ति होगी तो शिव उनको वहीं दर्शन देगें। पूजा के दौरान भगवान शंकर ने पुष्कर को साक्षात् दर्शन दिये, जिस कारण भीमेश्वर मंदिर का निर्माण हुआ, तभी से यहां शिव की पूजा अर्चना होती है। जिसके बाद अज्ञात वास के दौरान भीम ने इसी जगह रहकर भगवान शंकर की पूजा की थी और इस मंन्दिर का निर्माण सही तरीके से करवाया था। इधर शिवरात्रि के मौके पर शिवालयों में भारी भीड़ जुट रही है। नैनीताल के प्रसिद्ध नयना मंदिर में भी सुबह से ही पूजा अर्चना के लिये श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। भगवान शंकर की पूजा के लिये भक्त लम्बी-लम्बी कतारों में खड़े दिखाई दिये। भक्तगण शिव लिंग में दूध और जलाभिषेक के साथ ही बेलपत्री के पत्रों और वेर को भगवान शंकर के चरणों में अर्पित करते नजर आए। भक्तों का मानना है कि भगवान शंकर मात्र बेलपत्री एवं सच्ची भक्ति से ही मनचाहा फल प्रदान करते हैं।