राम मंदिर चढ़ावे में ₹8 करोड़ की 'चंदा चोरी',पांच कर्मचारी गिरफ्त में,एसआईटी जांच से खुलेंगे बड़े राज,बड़े साजिशकर्ता की तलाश में जांच एजेंसियां

₹8 crore 'donation theft' from Ram Mandir offerings; five employees arrested; SIT probe set to reveal major secrets; investigative agencies searching for the mastermind.

अयोध्या। सनातन आस्था के सबसे बड़े केंद्र अयोध्या के राम मंदिर से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। प्रभु राम के चरणों में भक्तों द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे में ₹8 करोड़ से अधिक के भारी गबन का खुलासा हुआ है। इस महाघोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, आस्था के नाम पर चल रहा एक बहुत बड़ा खेल सामने आ रहा है। इस पूरी 'चंदा चोरी' के पीछे पांच मुख्य किरदार (मोहरे) तो पकड़ में आ गए हैं, लेकिन सवाल अब भी वही है ये सिर्फ प्यादे हैं या इसके पीछे किसी रसूखदार की शह और बड़ी साजिश है? मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से 3 सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन कर दिया है, जिसे 7 दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर की दान राशि की गिनती की जिम्मेदारी संभालने वाले पांच मुख्य कर्मचारियों को पकड़ा गया है। इनके नाम हैं: लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर। इन पांचों ने न सिर्फ अपना गुनाह कबूल कर लिया है, बल्कि इन्हीं की निशानदेही पर अब तक ₹2.98 करोड़ की नकद रिकवरी भी की जा चुकी है। अवनीश के बैंक खाते को जब खंगाला गया, तो उसमें ₹5 लाख की अवैध रकम और कुछ जेवरात बरामद हुए। शनिवार को पुलिस की टीम ने रुदौली के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में स्थित लवकुश के घर पर दबिश दी, जहां से ₹10-12 लाख कैश बरामद होने की पुष्टि हुई है। पकड़े गए सभी संदिग्धों के बैंक खातों और ठिकानों को बारीकी से खंगाला जा रहा है, जिससे गबन का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। इस पूरे मामले में सबसे रहस्यमयी और बड़ा मोड़ 'टिन्नू' नाम के एक शख्स के रूप में सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, टिन्नू राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक बेहद रसूखदार पदाधिकारी का करीबी है और दशकों से उनसे जुड़ा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि पकड़े गए पांच आरोपियों में से एक, रमाशंकर, इस टिन्नू का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है। मंदिर के हर छोटे-बड़े काम में टिन्नू का सीधा हस्तक्षेप रहता था। पूर्व में ट्रस्ट के ही एक पूर्व पदाधिकारी ने कैमरे के सामने टिन्नू पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी रसूख की आड़ में इतने संवेदनशील स्थान से करोड़ों रुपये पार किए जाते रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी। इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बावजूद ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की चुप्पी ने कई तरह के कयासों को जन्म दे दिया है। आधिकारिक तौर पर अभी तक पुलिस में कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है, जिससे पुलिस के आला अधिकारी भी खुलकर कुछ बोलने से बच रहे हैं। हालांकि, पर्दे के पीछे से पुलिस की एक विशेष टीम रिकवरी और पूछताछ में जुटी है। जनता के बीच यह सवाल तैर रहा है कि आखिर इस खामोशी की वजह क्या है? क्या किसी बड़े नाम को बचाने की कोशिश हो रही है? इस मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। सीतापुर के खैराबाद पहुंचे खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने इस मुद्दे पर सरकार का बचाव करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा "राम मंदिर के चढ़ावे पर सवाल उठाने वाले पहले अपना खुद का इतिहास देख लें। जिन्होंने रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं, उन्हें इस पवित्र मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यह तीन सदस्यीय टीम अब कड़ियों को जोड़ेगी कि आखिर आठ करोड़ से अधिक का यह खेल कब से चल रहा था, सुरक्षा में चूक कहां हुई और इन पांचों मोहरों के पीछे छिपा असली मास्टरमाइंड कौन है। अयोध्या से लेकर लखनऊ तक, अब सबकी नजरें एसआईटी की आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।