संथाली सिनेमा का ऐतिहासिक उदय: फिल्म 'आंगेन' को मिला नेशनल अवार्ड, जमशेदपुर के रवि राज मुर्मू ने रचा इतिहास,सीएम ने दी बधाई

The historic rise of Santhali cinema: Film 'Angen' wins National Award; Jamshedpur's Ravi Raj Murmu makes history; CM extends congratulations.

रांची। झारखंड के सांस्कृतिक इतिहास में शनिवार का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। देश के सबसे प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही झारखंड की मिट्टी की खुशबू ने दिल्ली के राष्ट्रीय रंगमंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ दी। गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में संथाली भाषा की शॉर्ट फिल्म 'आंगेन' को 'बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर' (निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म) के प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह देश के सिनेमाई इतिहास में पहला मौका है, जब किसी संथाली भाषा की फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा सम्मान मिला है। इस ऐतिहासिक गौरव को हासिल करने वाले फिल्म के युवा निर्माता-निर्देशक रवि राज मुर्मू झारखंड के पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के रहने वाले हैं। लगभग 12 मिनट 10 सेकंड की यह अनूठी फिल्म संथाली समाज की लोकसंस्कृति और आज के कड़वे सामाजिक बदलाव का आईना है। फिल्म के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए निर्देशक रवि राज मुर्मू ने बताया आज हमारे समाज के अनगिनत युवा बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में गांव की मिट्टी छोड़कर महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। इस चकाचौंध में वे अपनी भाषा, समृद्ध संस्कृति और सामाजिक पहचान को पीछे छोड़ते जा रहे हैं। 'आंगेन' यही संदेश देती है कि आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को भूलना आत्मघाती हो सकता है।

आंगेन' की कहानी दादा-दादी से बचपन में सुनी एक रहस्यमयी संथाली लोककथा पर आधारित है। फिल्म में एक दिव्य देवी (सलोनी मुर्मू) एक साधारण चरवाहे युवक (रामचंद्र मार्डी) के प्रेम में पड़ जाती है और उसे अपने सम्मोहन से दिव्य लोक ले जाती है। जब वर्षों बाद उस युवक को धरती पर बसे अपने प्रिय गांव की याद आती है और वह वापस लौटता है, तो उसे पता चलता है कि उसका गांव अब आधुनिकता की भेंट चढ़ चुका है। वह देवलोक और मानव लोक के बीच एक ऐसे संसार में भटकने को मजबूर हो जाता है, जहां उसकी पहचान और अस्तित्व दोनों ही खो चुके हैं। पूर्वी सिंहभूम जिले के कुमीरमुंडी गांव के रहने वाले रवि राज मुर्मू की यह सफलता संघर्षों की देन है। उनके पिता महेश्वर मुर्मू एक साधारण किसान हैं। बचपन में ही मां कन्या मुर्मू के निधन के बाद उनकी दूसरी मां मीनू मुर्मू ने उनके फिल्म मेकर बनने के सपने को हमेशा सींचा। गांव से शुरुआती पढ़ाई के बाद रवि राज ने जमशेदपुर के सिटी कॉलेज से मास कम्युनिकेशन किया। इसके बाद वर्ष 2016 में देश के प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे से संपादन (Editing) में पीजी डिप्लोमा कर सिनेमा की बारीकियां सीखीं। फिल्म की सफलता में इसके कलाकारों का भी बड़ा योगदान रहा है।  इन्होंने 'ओल्ड सुकु' की मुख्य और जीवंत भूमिका निभाई है। यंग सुकु' के रूप में युवावस्था के संघर्षों को पर्दे पर उतारा। लोकआस्था और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक बनी 'देवी' का किरदार निभाया। इन्होंने मां की भूमिका निभाकर पारिवारिक ममता और संस्कारों को जीवंत किया। इस ऐतिहासिक गौरव पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रवि राज मुर्मू को बधाई देते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और संथाली भाषा का सम्मान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'आंगेन' ने संथाली संस्कृति की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। यह सफलता राज्य की उभरती हुई रचनात्मक प्रतिभाओं का प्रतीक है और यह हमारे अन्य युवा फिल्मकारों को अपनी लोकसंस्कृति और भाषा को सिनेमा के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी।