उन्नाव रेप केसः कुलदीप सेंगर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी! तीन महीने में फैसला दे दिल्ली हाईकोर्ट, जमानत देने से इंकार

Unnao rape case: Supreme Court sternly comments on Kuldeep Sengar's petition! Delhi High Court to rule within three months, refuses bail.

नई दिल्ली। भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक सेंगर को जमानत देने से इनकार कर दिया है। साथ ही अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह सेंगर की अपील पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करे और तीन महीने के अंदर फैसला करे। सेंगर को इस मामले में 4 मार्च 2020 को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सेंगर के वकील ने तर्क दिया कि वह 7 साल 7 महीने की सजा काट चुके हैं और छूट मिलाकर यह अवधि 9 साल 7 महीने हो जाती है। हालांकि सीजेआई ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे अपराधों में छूट की पात्रता बहस का विषय है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़िता की सजा बढ़ाने वाली अपील और सह-आरोपियों की याचिकाओं पर भी एक साथ सुनवाई की जाए। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पीड़िता के वकील महमूद प्राचा को मीडिया में इंटरव्यू देने और ड्रामा करने पर कड़ी चेतावनी दी। सीजेआई ने कहा कि मामला अदालत में लंबित होने के दौरान मीडिया ट्रायल करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने वकील को सख्त लहजे में कहा कि वे पहले भी उन्हें बचा चुके हैं, लेकिन अब इस तरह का आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने इसे अंतिम चेतावनी करार देते हुए कहा कि न्यायपालिका बाहर हो रहे मीडिया ट्रायल की पूरी जानकारी रखती है। कुलदीप सिंह सेंगर के वकील ने दलील दी है कि अगर 10 साल की पूरी सजा काट ली गई तो अपील का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह शख्स पहले से ही दूसरे अपराध में उम्रकैद की सजा काट रहा है, क्या यह बात विचार करने योग्य नहीं है? अदालत ने सॉलिसिटर जनरल की बात का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को अपने कानून के शासन पर गर्व है, जहां देश की अखंडता पर हमला करने वाले आतंकवादियों को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया।