भारत की समुद्री ताकत में ऐतिहासिक इजाफाः विशाखापत्तनम में आईएनएस अरिदमन नौसेना में शामिल! परमाणु क्षमता और बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस तीसरी स्वदेशी पनडुब्बी

A historic boost to India's maritime power: INS Aridaman is commissioned into the Navy in Visakhapatnam! The third indigenous submarine equipped with nuclear capability and ballistic missiles.

नई दिल्ली। भारत ने अपनी सामरिक और समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए आज एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित भव्य समारोह के दौरान भारतीय नौसेना में स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को शामिल किया गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, शब्द नहीं शक्ति है, अरिदमन! आईएनएस अरिदमन देश की तीसरी ऐसी परमाणु शक्ति से लैस बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है, जो भारत के सामरिक रक्षा तंत्र को और मजबूत बनाती है। इससे पहले आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। अब अरिदमन के शामिल होने से भारत की परमाणु त्रि-आयामी प्रतिरोधक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई है। यह अत्याधुनिक पनडुब्बी पानी के भीतर करीब 44 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है और इसकी सबसे बड़ी खासियत है, इसकी ‘स्टेल्थ क्षमता’ यानी दुश्मन के लिए इसका पता लगाना बेहद मुश्किल है। अरिदमन के पास के-15 मिसाइल और के-4 मिसाइल जैसी घातक बैलिस्टिक मिसाइलों को लॉन्च करने की क्षमता है, जो लंबी दूरी तक सटीक निशाना साध सकती हैं।

तकनीकी दृष्टि से भी अरिदमन बेहद उन्नत है। पानी के ऊपर इसका वजन करीब 6,000 टन है, जबकि पूरी तरह जलमग्न होने पर यह लगभग 7,000 टन तक पहुंच जाता है। इस पनडुब्बी का संचालन करीब 95 से 100 प्रशिक्षित नौसैनिकों की टीम करती है, जिसमें अधिकारी और सेलर्स दोनों शामिल होते हैं। इसका दिल यानी इंजन एक 83 मेगावाट का छोटा परमाणु रिएक्टर है, जो इसे लंबे समय तक बिना सतह पर आए संचालन करने में सक्षम बनाता है। यह रिएक्टर तकनीक तमिलनाडु के कलपक्कम में विकसित नौसैनिक परमाणु तकनीक पर आधारित है, जो भारत की स्वदेशी क्षमताओं का बड़ा उदाहरण है। आईएनएस अरिदमन न सिर्फ आकार में बड़ी है, बल्कि अपनी मारक क्षमता और तकनीकी दक्षता के मामले में पहले की पनडुब्बियों से कहीं अधिक शक्तिशाली मानी जा रही है। यह भारतीय नौसेना को गहरे समुद्र में रणनीतिक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी। वहीं इस श्रृंखला की चौथी पनडुब्बी भी निर्माण के अंतिम चरण में है और फिलहाल समुद्री परीक्षण (सी ट्रायल) के दौर से गुजर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले वर्ष इसे भी नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा और भी मजबूत हो जाएगी। कुल मिलाकर आईएनएस अरिदमन का नौसेना में शामिल होना न सिर्फ तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह भारत के आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र और वैश्विक सामरिक शक्ति के रूप में उभरते कद का भी प्रतीक है।