गुलामी के अंधेरों में आज़ादी की लौ जलाने वाले वंदे मातरम् को मिला कानूनी संरक्षण,अब अपमान पर हो सकती है 3 साल तक की जेल!गाते समय सावधान मुद्रा अनिवार्य

'Vande Mataram'—the flame of liberty that shone amidst the darkness of servitude—has now received legal protection; insulting it may now lead to imprisonment of up to three years! Standing at attenti

देश की आजादी की लड़ाई में क्रांति की आवाज बने “वंदे मातरम्” को अब कानूनी सुरक्षा का कवच मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस संशोधन के बाद अब “वंदे मातरम्” का अपमान करना, उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना या राष्ट्रीय गीत के प्रति असम्मानजनक व्यवहार करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
सरकार के इस फैसले के बाद “वंदे मातरम्” को वही कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा जो अब तक राष्ट्रगान “जन गण मन”, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान को हासिल था। नए प्रावधान के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकेगी। सूत्रों के अनुसार, संसद से विधेयक पारित होने के बाद यह कानून औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा।
“वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा रहा है। अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान यही गीत क्रांतिकारियों की ताकत और जनता की हुंकार बना था। इतिहासकारों के अनुसार, “वंदे मातरम्” की रचना महान साहित्यकार Bankim Chandra Chattopadhyay ने की थी। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास Anandamath में शामिल था, जो वर्ष 1882 में प्रकाशित हुआ था। मूल रूप से यह गीत संस्कृत और बांग्ला मिश्रित भाषा में लिखा गया था।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1896 के अधिवेशन में पहली बार “वंदे मातरम्” सार्वजनिक रूप से गाया गया था। उस ऐतिहासिक अवसर पर इसे गुरुदेव Rabindranath Tagore ने स्वर दिया था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया। अंग्रेज सरकार ने कई बार इस गीत पर रोक लगाने की कोशिश की, लेकिन देशभक्तों के जोश को दबा नहीं सकी।
स्वतंत्र भारत में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने “जन गण मन” को राष्ट्रगान और “वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था। संविधान सभा ने स्पष्ट कहा था कि दोनों को समान सम्मान प्राप्त होगा। हालांकि अब तक राष्ट्रीय गीत के अपमान को लेकर अलग से कानूनी दंड का प्रावधान नहीं था, जिसे केंद्र सरकार अब बदलने जा रही है।
इसी वर्ष जनवरी में गृह मंत्रालय ने “वंदे मातरम्” के गायन को लेकर विस्तृत प्रोटोकॉल भी जारी किया था। दिशा-निर्देशों के अनुसार, आधिकारिक कार्यक्रमों में “वंदे मातरम्” की पहली छह पंक्तियां गाई जाएंगी, जिनकी निर्धारित अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी। साथ ही जिन समारोहों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों प्रस्तुत किए जाएंगे, वहां पहले “वंदे मातरम्” गाया जाएगा। राष्ट्रपति के आगमन, ध्वजारोहण और अन्य औपचारिक आयोजनों के दौरान इसके समय सभी लोगों का सावधान मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य माना गया है।
राष्ट्रवादियों ने सरकार के इस फैसले को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सम्मान को मजबूत करने वाला बताया । वहीं राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस निर्णय को लेकर बहस भी तेज हो गई है। लेकिन इतना तय है कि “वंदे मातरम्”, जिसने कभी गुलामी के अंधेरे में आजादी की लौ जगाई थी, अब उसे कानून की भी ताकत मिलने जा रही है।