असम में यूसीसी लागूः बहुविवाह पर पूरी तरह रोक! लिव-इन छुपाने पर जेल, शादी, तलाक और संपत्ति के नियमों में बड़ा बदलाव

UCC implemented in Assam: Polygamy completely banned! Jail for concealing live-in relationships, major changes to marriage, divorce, and property laws.

गुवाहाटी। असम विधानसभा ने बुधवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल को मंजूरी देकर राज्य की कानूनी और सामाजिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर दिया है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम ऐसा करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने विधानसभा सत्र के आखिरी दिन भारी हंगामे के बीच इस विधेयक को पारित कराया। विपक्ष ने बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने बहुमत के दम पर इसे पास करा लिया। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के लिए शादी,0 तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और संपत्ति से जुड़े मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। हालांकि, आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है ताकि उनकी पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक पहचान सुरक्षित रह सके।

बहुविवाह पर सख्ती, अब एक से ज्यादा शादी पर 7 साल तक की जेल
नए यूसीसी कानून के तहत बहुविवाह यानी एक से अधिक शादी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति एक से ज्यादा शादी करते हुए दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 82 के तहत कार्रवाई होगी और उसे 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा जबरदस्ती, धोखे, पहचान छिपाकर या डराकर शादी करने पर भी 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। बाल विवाह या बिना सहमति के शादी कराने के मामलों में 2 साल तक की सजा तय की गई है।

शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
बिल में शादी और तलाक के सरकारी रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाया गया है। शादी या तलाक होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज जमा करता है या गलत जानकारी देता है तो उसे 3 महीने की जेल, 25 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। इसके अलावा, कानूनी प्रक्रिया के बिना अवैध तलाक लेने पर 3 साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है। तलाकशुदा व्यक्ति की दूसरी शादी में गैरकानूनी शर्तें थोपने पर भी 3 साल की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

लिव-इन रिलेशनशिप पर पहली बार सख्त नियम
असम यूसीसी बिल में पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी सख्त कानूनी व्यवस्था लागू की गई है। अब किसी भी लिव-इन कपल को एक महीने के भीतर अपने संबंध का सरकारी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई कपल ऐसा नहीं करता है तो उसे 3 महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। वहीं लिव-इन डिक्लेरेशन में तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार का दावा है कि इन नियमों से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और भविष्य में विवादों को कम किया जा सकेगा।

बेटियों और माता-पिता को संपत्ति में बराबरी का अधिकार
नए कानून में संपत्ति के बंटवारे से जुड़े नियमों को भी आधुनिक स्वरूप दिया गया है। अब बेटों की तरह बेटियों और माता-पिता को भी संपत्ति में बराबरी का कानूनी अधिकार मिलेगा। सरकार ने इसे सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया है। हालांकि विपक्षी दलों ने इस कानून का विरोध करते हुए इसे समाज और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि इतने व्यापक प्रभाव वाले कानून को जल्दबाजी में पास नहीं किया जाना चाहिए था।