उत्तराखंड/अल्मोड़ा:क्या यही है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान? स्कूल के प्रिंसिपल पर लगे छत्राओं को गलत तरह से छूने के आरोप,पैरेंट्स ने किया हंगामा,वीडियो हुई वायरल
अल्मोड़ा:19/12/2022
एक तरफ सरकारें बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है और हर स्तर पर बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते हैं जो सरकारी नारों और दावों को पलीता लगाते हैं। कभी-कभी तो कुछ ऐसे मामले सामने आते हैं जो देवभूमि को शर्मशार करते हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर अल्मोड़ा के एक स्कूल में हंगामे का वीडियो वायरल हो रहा है। आरोपों के अनुसार इस मामले ने गुरू की गरिमा को तार-तार कर दिया है।
दरअसल, फेसबुक पर गोपाल पहाड़िया नाम के एक यूजर ने वीडियो के साथ कुछ जानकारी साझा की है। वीडियो में एक छात्रा रोती दिख रही है और उसके पिता का आरोप है कि विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा बच्चियों को गलत इरादे से शरीर पर टच किया जाता है। पोस्ट में लिखा गया है कि राजकीय इंटर कॉलेज, पंतस्थली, भिकियासैंण, अल्मोड़ा के प्रधानाचार्य शिक्षक ‘गुरू’ के भेष में हैवान हैं। राजनैतिक पकड़ अच्छी होने के चलते कई बार शिकायत के बावजूद विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दौरान वीडियो में कई छात्राएं प्रधानाचार्य पर आरोप लगाती दिख रही हैं। हांलाकि आवाज 24x7 वीडियो और आरोपों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन जिस प्रकार यह वीडियो सामने आ रहा है उससे शिक्षा का मंदिर कहा जाने वाला विद्यालय अपवित्र होता नजर आता है और गुरू की गरिमा तार-तार होती दिख रही है।
बता दें कि अल्मोड़ा जिले में इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें शिक्षिकाओं और बालिकाओं के साथ गलत व्यवहार किए जाने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतना बड़ा अपराध होने के बावजूद शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी और प्रशासनिक अमला क्यों चुप है, क्यों नहीं ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होती है। अल्मोड़ा से आए इस ताजा मामले से लोगों में रोष देखने को मिल रहा है। हांलाकि गोपाल पहाड़िया के इस पोस्ट पर बहुत सारे कमेंट किए जा रहे हैं और कमेंट में ही लोगों ने तमाम वो शिकायती पत्र भी पोस्ट अटैच किए हैं जो मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए हैं। लोगों का कहना है कि कई बार इस मामले में शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में लगातार अध्यापिका और छात्राओं के साथ उत्पीड़न के मामले सामने आ रहे हैं जिसमें उत्पीड़न करने वाला विद्यालय का ही कोई शिक्षक होता है या फिर उच्च अधिकारी लेकिन जब भी इस तरह की शिकायत स्थानीय राजस्व पुलिस या स्थानीय पुलिस को की जाती है तो जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर दी जाती है और आरोपी को बचा लिया जाता है ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी देहरादून में बैठे निदेशक स्तर के अधिकारियों को नहीं है क्योंकि मीडिया के माध्यम से पूरे उत्तराखंड में इस तरह की खबर वायरल हो जाती है और स्वयं पत्रकार भी इस तरह की सूचना उच्च अधिकारियों तक पहुंचाते हैं और उनका वर्जन लेते हैं जैसे कि अल्मोड़ा के बुझान मैं महिला प्रवक्ता के साथ छेड़खानी होने के बाद शिक्षा निदेशक को भी सूचना दी गई थी जिसके बाद उन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया था लेकिन आरोपी पर कार्रवाई करने के बजाय उत्पीड़ित महिला प्रवक्ता का ही दुर्गम क्षेत्र में स्थानांतरण कर दिया गया जिससे वर्तमान शासन और प्रशासन की मंशा और कार्यप्रणाली जनता के सामने है जहां एक और पुष्कर सिंह धामी द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए नित निरंतर नई नई योजनाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास किया जा रहा है वही धरातल पर हकीकत ठीक उल्टी है अगर ग्राउंड जीरो पर जाकर देखे हैं तो पता चलता है कहीं विद्यालय कहीं कोई संस्थान या फिर कोई सरकारी कार्यालय जहां पर भी महिलाएं कार्य करती हैं वहां पर उत्पीड़न एक सामान्य बात हो गई है लेकिन सवाल अभी वहीं खड़ा है कि हम इस पर कितनी भी खबर कर लें अगर सरकार उदासीन है तो प्रशासन भी उदासीन ही रहेगा और जब तक ऐसा होगा तब तक महिलाएं प्रताड़ित होती रहेंगी