उत्तराखण्डः उत्तरकाशी में सांप के काटने से महिला की दर्दनाक मौत! परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, 6 माह पहले हुआ था पति का निधन
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां विकासखंड नौगांव के बलाड़ी गांव में खेत में काम कर रही एक 58 वर्षीय महिला की विषैले सांप के डंसने से मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है। महिला के पति का भी करीब छह महीने पहले हृदयगति रुकने से निधन हो गया था। पति की मौत के बाद किसी तरह परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रही महिला की असमय मौत ने परिजनों पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। जानकारी के अनुसार, बलाड़ी गांव निवासी सुगंधरा देवी शनिवार को अपने टमाटर के खेत में रोजमर्रा की तरह निराई-गुड़ाई का कार्य कर रही थीं। इसी दौरान खेत में छिपे एक विषैले सांप ने उनके हाथ पर डंस लिया। सांप के काटते ही उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों ने बिना समय गंवाए उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नौगांव ले जाने का प्रयास किया, लेकिन दुर्भाग्यवश अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पूरे गांव में मातम पसर गया।
छह महीने पहले पति का भी हुआ था निधन
ग्रामीणों के अनुसार सुगंधरा देवी के पति भरत सिंह होमगार्ड विभाग में कार्यरत थे। लगभग छह महीने पहले हृदयगति रुकने के कारण उनका निधन हो गया था। पति की मृत्यु के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी सुगंधरा देवी के कंधों पर आ गई थी। वे खेती-किसानी कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रही थीं। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। अब उनकी असामयिक मृत्यु ने परिवार को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। घटना पर जिला पंचायत सदस्य विजय बंधानी और पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता तथा उचित मुआवजा देने की मांग की है।
ग्रामीणों ने उठाई स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की मांग, वन विभाग ने की अपील
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम (सर्पदंश रोधी इंजेक्शन) उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण कई बार मरीजों की जान चली जाती है। यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संसाधन और दवाएं उपलब्ध हों तो ऐसी घटनाओं में कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। वहीं वन विभाग के एसडीओ साधु लाल ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि बरसात के मौसम में सांप अधिक सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में खेतों, झाड़ियों और घास वाले इलाकों में काम करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि कहीं सांप दिखाई दे तो उसे मारने का प्रयास न करें। तत्काल वन विभाग को सूचना दें ताकि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम सुरक्षित तरीके से सांप को पकड़कर जंगल में छोड़ सके।