नैनीताल:आरोप पत्र में देरी रोकने के लिए हाईकोर्ट सख्त;पॉक्सो में 45 और जघन्य अपराधों में 75 दिन में समयबद्ध रिपोर्ट के लिए एफएसएल निदेशक को दिए निर्देश
नैनीताल।
पॉक्सो,एनडीपीएस और अन्य जघन्य अपराधों के मामलों में जांच और आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया में देरी रोकने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने एफएसएल के निदेशक को निर्देश दिया है कि पॉक्सो मामलों में अधिकतम 45 दिन और अन्य जघन्य अपराधों में 75 दिन के भीतर फोरेंसिक रिपोर्ट पुलिस को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों के ट्रायल में वैज्ञानिक साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में कानून में निर्धारित 60 और 90 दिन की अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने के लिए फोरेंसिक रिपोर्ट का समय पर उपलब्ध होना जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुपालन में डीजीपी और गृह सचिव ने शपथ पत्र दाखिल कर राज्य में जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। बताया गया कि पूरे प्रदेश में 150 पुलिस अधिकारियों का विशेष जांच दल गठित कर तैनात किया गया है। जरूरत पड़ने पर इस दल में अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
शासकीय अधिवक्ता अमित भट्ट ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जोगिंदर कुमार और ललिता कुमारी मामलों में दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
जांच प्रक्रिया को तेज करने के लिए फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में वैज्ञानिक अधिकारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है। पहले 11 वैज्ञानिक अधिकारी थे, जिन्हें बढ़ाकर 28 कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों को जांच के दौरान लिए गए नमूनों को एक सप्ताह के भीतर फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एकलपीठ ने गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक की ओर से उठाए गए सुधारात्मक कदमों पर संतोष जताते हुए उम्मीद की कि फोरेंसिक प्रयोगशाला निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराएगी और जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होगी। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को पुलिस अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव भी दिया। प्रशिक्षण में अनुभवी न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की सेवाएं लेने की बात कही गई है।
वहीं, संबंधित मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कंपनी के पंजीकृत कार्यालय दिल्ली और कॉर्पोरेट कार्यालय रुद्रपुर से संबंधित जानकारी के साथ कंपनी के अधिकृत निदेशक के संबंध में आवश्यक विवरण भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए।