Sep 30, 2026 Login

नैनीताल:हाईकोर्ट को गुमराह करने की कोशिश पड़ी भारी,पूर्व याचिका और कोर्ट का आदेश छिपाकर मांगी अग्रिम जमानत खारिज,कोर्ट ने लगाया 50 हजार का जुर्माना!

Nainital: Attempt to mislead the High Court proved costly; anticipatory bail sought by concealing previous petition and court order rejected; court imposed a fine of Rs 50,000!

नैनीताल। पूर्व में दाखिल आपराधिक रिट याचिका और उसमें पारित आदेश की जानकारी छिपाकर अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करना आवेदक को भारी पड़ गया। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले को कोर्ट को गुमराह करने का जानबूझकर किया गया प्रयास मानते हुए अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने आवेदक पर 50 हजार रुपये की अनुकरणीय कॉस्ट भी लगाई है।

मामला भगवानपुर, हरिद्वार निवासी समीर से जुड़ा है। उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल कर गिरफ्तारी से राहत देने का अनुरोध किया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से लिखित निर्देशों के माध्यम से कोर्ट को बताया गया कि अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करने से पहले आवेदक ने एक आपराधिक रिट याचिका दायर की थी। इसमें उसने गिरफ्तारी पर रोक लगाने के साथ ही अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग की थी।

राज्य की ओर से बताया गया कि उक्त रिट याचिका में आवेदक ने कोर्ट के समक्ष यह वचन दिया था कि वह 20 मई 2026 तक या उससे पहले संबंधित कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर देगा। हालांकि, आवेदक ने इस वचन का पालन नहीं किया।

राज्य सरकार का कहना था कि इसके बजाय आवेदक ने पूर्व में दाखिल रिट याचिका और उसमें पारित आदेश के तथ्यों को जानबूझकर छिपाते हुए अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल कर दी। राज्य की ओर से इसी आधार पर अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज करने का अनुरोध किया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता की ओर से प्रस्तुत लिखित निर्देशों को रिकॉर्ड पर लिया।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने आवेदक के आचरण को कोर्ट को गुमराह करने का जानबूझकर किया गया प्रयास माना। कोर्ट ने इसी आधार पर अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज करते हुए आवेदक पर 50 हजार रुपये की अनुकरणीय कॉस्ट लगाई।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि चार सप्ताह के भीतर उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में जमा करनी होगी। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर इसे संबंधित जिलाधिकारी/कलेक्टर के माध्यम से भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह वसूल किया जाएगा।