उत्तराखंड:जल रहा है पहाड़!हिंदू मुस्लिम की आग में पहाड़ तनाव में!उत्तरकाशी जिले की सीमाएं सील,ड्रोन से रखी जा रही नज़र!
राज्य स्थापना के बाद पहली बार उत्तराखंड धूं धूं कर जल रहा है। उत्तराखंड के पहाड़ उस आग से नही जल रहे जो आप सोच रहे हो बल्कि उत्तराखंड को नफ़रत और साम्प्रदायिक दंगों की आग जला रही है। उत्तराखंड में हिंदू मुस्लिम के बीच पैदा हुए तनाव भले ही राजनीतिक दलों के लिए वोट बटोरने के लिए तुरुप के इक्के का काम करे लेकिन इस तनाव में जलने वाला न हिंदू अकेला है न मुस्लिम बल्कि इस तनाव की आग में उत्तराखंड का हर वो नागरिक जल रहा है जिसने पृथक राज्य का सपना इस उम्मीद से देखा था कि भविष्य में पहाड़ो का विकास होगा। पहाड़ो के गांव तक सड़के पहुंचेगी,पलायन घटेगा,आम आदमी की आमदनी बढ़ेगी,पहाड़ के लघु उद्योग बड़े स्तर पर भारत के कोने कोने तक पहुंचेंगे,उत्तराखंड में शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा। लेकिन ये सपना पूरा भी नही हुआ और उत्तराखंड में ऐसा माहौल बन गया है कि हिंदू मुस्लिम एक दूसरे को फूटी आंख नही भा रहे। मुस्लिम खुल्लमखुल्ला कुत्ते तुझे देख लेंगे,सिर तन से जुदा,गजवा ए हिन्द की शुरुआत इंशाअल्लाह उत्तराखंड से होगी जैसी धमकी दे रहे है तो वही हिंदू संगठन पिछले 40 सालों से उत्तराखंड में रह रहे मुस्लिम लोगो को राज्य से इसीलिए खदेड़ रहे हैं,क्योंकि राज्य में लव जिहाद,लैंड जिहाद इत्यादि के मामले बढ़ने लगे है।
हिंदू मुस्लिम की लड़ाई करने वाले मुट्ठीभर लोग है जो कट्टरपंथी की आग में खुद भी जल है और उत्तराखंड को भी जला रहे हैं,जबकि पृथक उत्तराखंड राज्य की कल्पना उत्तराखंड में निवास कर रहे तत्कालीन हर निवासी ने की थी चाहे वो हिंदू था,या मुस्लिम, चाहे वो पहाड़ में रहने वाला देसी था या पंजाबी। सबने राज्य के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में आज से 10 साल पहले तक ऐसा माहौल नही था जो अब होने लगा।
आज उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जो कि शांत और एक ऐसा जिला माना जाता था जहां शायद ही कभी तनावपूर्ण माहौल रहा हो। लेकिन आज उत्तरकाशी जिले की सीमाएं सील हैं, पूरे क्षेत्र में ड्रोन से नजर रखी जा रही है। उधर, व्यापारी और हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों को पुलिस ने नौगांव से एक किमी आगे रोक दिया है।
नगर पालिका क्षेत्र,बड़कोट नौगांव में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद है। व्यापारियों और हिंदू संगठनों से जुड़े कुछ लोगो को पुलिस ने नौगांव से एक किमी आगे रोक दिया।
ये तनाव इसीलिए पैदा हुआ क्योंकि बीती 26 मई को मुस्लिम और हिंदू दो लड़कों ने एक नाबालिग लड़की को भगाने का प्रयास किया था। इस मामले में दोषी दोनों लड़के थे,जिसके बाद उत्तरकाशी में साम्प्रदायिक तनाव पैदा हो गया। हिंदू मुस्लिम दोनों समुदायों ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाया लेकिन ये भूल गए कि धर्म समुदाय से बड़ा एक और धर्म है इंसानियत का। न तो मुस्लिम ने मरने के बाद जन्नत/जहन्नुम देखा न हिंदू ने मरने के बाद स्वर्ग /नर्क देखा। धरती पर रहकर आपसी लड़ाई लड़ते लड़ते आज उत्तराखंड जैसे स्वर्ग को नफरत की आग में नर्क बनाया जा रहा है।