उत्तराखण्डः उपनल कर्मचारियों की अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट का सख्त रुख! सचिव वित्त और सचिव कार्मिक को बनाया पक्षकार, जारी किया नोटिस
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ हल्द्वानी की अवमानना याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद संघ द्वारा पेश किये गए प्रार्थनापत्र के आधार पर न्यायमूर्ती अलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने सचिव वित्त व सचिव कार्मिक को पक्षकार बनाते हुए उन्हें नोटिस जारी कर उनसे पूर्व में दिए गए निर्णय का अनुपालन न करने के आधार पर अपना जवाब पेश करने को कहा है। साथ में कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 की तिथि नियत की है। नवम्बर 2025 को हुई सुनवाई पर संघ की तरफ से कोर्ट के सामने कहा गया कि खंडपीठ के द्वारा पारित आदेश का अनुपालन अभी तक राज्य सरकार ने नही किया। और राज्य का प्रसाशन उस आदेश का अनुपालन करने में अपनी अभी भी अशमार्थता जता रहा है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि उपनल कर्मचारियों को पहले समान कार्य समान वेतन दिया जाए, उनके वेतन पर लगने वाले जीएसटी को न वसूला जाए और नियमितीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाए। लेकिन कोर्ट के आदेश कि अवहेलना करने के बाद भी सरकार ने जो हलफनामा पेश किया, वह उच्च न्यायलय के आदेश के विपरीत है। प्रार्थना पत्र में मुख्य मंत्री से प्रार्थना की गयी है कि उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन करवाया जाए। कहा गया कि आदेश होने के बाद यदि संबंधित अधिकारी 2025 की नियमावली का अनुपालन नहीं करते हैं तो पूरा उपनल कर्मचारी संघ इस नीति के खिलाफ है। इस प्रकरण पर मुख्य मंत्री का संज्ञान लेना अति आवश्यक है। मामले के अनुसार आज संविदा कर्मचारी संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष वाद को मेंशन करते हुए कहा कि पूर्व मे कोर्ट की खंडपीठ ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के सम्बंध में एक आदेश जारी किया था। लेकिन इस आदेश पर अब तक राज्य सरकार की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिया गया। न ही इसे उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड में लाया गया है। पूर्व में संघ की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस अवमानना याचिका पर (उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ बनाम आनन्द बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड) की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की गयी थी।