उत्तराखण्डः लोकायुक्त नियुक्ति में देरी पर हाईकोर्ट नाराज! सरकार को लगाई फटकार, आधे घंटे में मांगा जवाब! सर्च कमेटी के फैसलों की रिपोर्ट 16 जून तक तलब

Uttarakhand: The High Court is displeased with the delay in the Lokayukta appointment. It reprimanded the government and demanded a response within half an hour. A report on the search committee's de

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी द्वारा लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने आज मामले की सुनवाई पूर्व के आदेश के आधार पर 11 बजे की। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आदेश होने पर मामले में क्या प्रगति रिपोर्ट पेश गयी। जिसपर महाधिवक्ता ने कहा कि लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में कार्यवाही चल रही है। लेकिन कार्यवाही धीमी गति से चल रही है। इसलिए उन्हें और मौका दिया जाए। इसपर कोर्ट ने सरकार से कहा कि आधे घण्टे में कोर्ट को अवगत कराएं कि आखिरकर कोर्ट के आदेश का अनुपालन क्यों नही हो रहा? इसपर कोर्ट ने सरकार को आधे घण्टे का समय देते हुए कहा कि लोकायुक्त की नियुक्ति करने वाली कमेटी की अगली बैठक कब होगी? इसके बाद हुई सुनवाई पर सरकार ने स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि उसकी नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी की पहली बैठक जून पहले सप्ताह में होने वाली है।

कोर्ट ने सरकार का पक्ष सुनते हुए अगली सुनवाई हेतु 16 जून की तिथि नियत की है। तब तक कोर्ट ने सर्च कमेटी द्वारा लिए गए निर्णयों से अवगत कराने को कहा है। अब कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 16 जून को करेगी। पिछली तिथि को कोर्ट ने सरकार से कहा था कि 3 अप्रैल को जो सर्च कमेटी की बैठक होनी थी। बैठक में लिए गए निर्णय को शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश करें। लेकिन 3 अप्रैल को सर्च कमेटी का कोरम पूर्ण नही होने के कारण उसकी बैठक नही हो पाई। जिसपर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की तिथि नियत की गई थी। इससे पहले की तिथि पर हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति करने के लिए कोर्ट से छः माह का समय मांगा गया था, लेकिन कोर्ट ने तीन माह का समय देते हुए लोकायुक्त को नियुक्त करने को कहा था। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नही हो पाई। आज तक सर्च कमेटी की बैठक नही हो पाई। जबकि इनकी नियुक्ति करने के लिए वर्ष 2021 में जनहित याचिका दायर की गई थी। हुई सुनवाई पर कोर्ट ने कहा था कि एक वर्ष पहले भी सरकार की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए समय मांगा गया था। अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नही हो पाई। अब और समय मांगा जा रहा है। मामले के अनुसार जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नही की। जबकि संस्थान के नाम पर वार्षिक 2 से 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है।

जनहित याचिका में कहा गया है कि कर्नाटक में व मध्य प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जा रही है परंतु उत्तराखंड में तमाम घोटाले हो रहे हैं। हर एक छोटे से छोटा मामला उच्च न्यायालय में लाना पड़ रहा है। जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन है, जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनैतिक नेतृत्व के हाथों में है। वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नही है जिसके पास यह अधिकार हो की वह बिना शासन की पूर्वानुमति के’ किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजिकृत कर सके। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका सम्पूर्ण नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति शीघ्र की जाय। जिससे कि राज्य में हो रहे करप्शन पर रोक लग सके। उनके मामलों की सुनवाई लोकायुक्त के वहां होगी और न्यायलयों का कार्यभार में कमी आएगी। जबकि यह पद वर्ष 2013 से खाली पड़ा है।