नैनीताल: नरेश पांडे केस में बड़ा कानूनी मोड़! युवती को पुलिस रिमांड पर लेने की मांग अदालत ने ठुकराई, कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए दी जमानत
नैनीताल। मल्लीताल थाने में नरेश पांडे के खिलाफ दर्ज एफआईआर में जिस युवती को पुलिस आज रिमांड पर लेने के लिए अदालत में लाई, वह स्वयं इसी मामले में पीड़िता के रूप में दर्ज है। पुलिस ने उसे रिमांड पर लेने का अनुरोध किया था, लेकिन अदालत ने मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार किया। अदालत ने प्रथम दृष्टया यह माना कि जिस धारा के तहत कार्रवाई की गई है, उसके कानूनी प्रावधानों के अनुसार केवल एक महिला द्वारा उस अपराध का कारित होना संभव नहीं है। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 की परिभाषा का भी संज्ञान लिया, जिसमें अपराध की व्याख्या पुरुष द्वारा किए गए कृत्य के संदर्भ में की गई है।
अदालत ने यह भी देखा कि यदि आरोपित अपराध सात वर्ष से अधिक की सजा वाला होता, तो पुलिस रिमांड का प्रश्न अलग हो सकता था। वहीं, सात वर्ष तक की सजा वाले मामलों में सुप्रीम कोर्ट के सत्येंद्र कुमार अंतिल फैसले के अनुसार गिरफ्तारी को अंतिम विकल्प माना गया है और बिना आवश्यक कारण गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए। यह भी ध्यान में रखा गया कि संबंधित युवती स्थानीय निवासी है। इन सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने पुलिस की रिमांड की मांग स्वीकार नहीं की और संबंधित युवती को जमानत प्रदान कर दी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने पुलिस की रिमांड अर्जी पर सुनवाई के बाद युवती को जमानत प्रदान की। उनका कहना था कि पुलिस रिमांड के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सकी। अधिवक्ता के अनुसार, अदालत ने मामले के कानूनी पहलुओं और पुलिस द्वारा प्रस्तुत आधारों पर विचार करने के बाद जमानत देने का निर्णय लिया। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि जिस युवती को पुलिस अदालत में लेकर आई, वह मूल मुकदमे की पहली शिकायतकर्ता और पीड़िता है। उनका दावा है कि मामले में एक अन्य महिला के बयानों के आधार पर उसे आरोपी बनाया गया, जबकि पुलिस रिमांड की मांग के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। पुलिस का आरोप है कि संबंधित युवती ने नरेश पांडे के साथ मिलकर अन्य महिलाओं को उसके संपर्क में लाने और उनके साथ शारीरिक संबंध स्थापित कराने में भूमिका निभाई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही होगी।
आपको बता दें नैनीताल के एक शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाली छात्रा ने भवाली व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश पांडे पर यौन शोषण, दबाव बनाकर गर्भपात कराने, धमकी देने और अन्य गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के आधार पर मल्लीताल कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामला सामने आने के बाद पूरे नैनीताल जिले में इसकी व्यापक चर्चा रही। गिरफ्तारी से बचने के लिए नरेश पांडे ने पहले जिला न्यायालय और उसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की, लेकिन दोनों अदालतों से उसे कोई राहत नहीं मिली। इसके बावजूद वह कुछ समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। इसी बीच एक अन्य युवती ने भी नरेश पांडे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मंगलवार देर रात काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद नरेश पांडे को गिरफ्तार कर लिया। अगले दिन जिला न्यायालय में पेशी के दौरान अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए जेल भेजने के आदेश दिए।