उत्तराखण्डः अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में जांच तेज! RBI की फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुली करोड़ों के गबन की परतें, पूर्व सचिव समेत पांच पर FIR
देहरादून। बहुचर्चित अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। भारतीय रिज़र्व बैंक की फॉरेंसिक जांच में बैंक में करोड़ों रुपये के गबन और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर बैंक की वर्तमान शाखा प्रबंधक रिंकू गौतम की शिकायत पर शहर कोतवाली में पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ समेत विभिन्न गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी में बैंक के तत्कालीन सचिव (जिनका निधन हो चुका है), दो शाखा प्रबंधक, एक कार्यकारी शाखा प्रबंधक और एक हार्डवेयर इंजीनियर को नामजद किया गया है। आरोप है कि इन सभी ने आपसी मिलीभगत से बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर करोड़ों रुपये का गबन किया और कई ग्राहकों की जमा धनराशि अपने खातों में ट्रांसफर कर ली। मामले में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) और आरबीआई दोनों स्तरों पर जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और प्राथमिकी दर्ज हो सकती हैं और जांच के दायरे में कई अन्य लोग भी आ सकते हैं। दरअसल, अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में घोटाले का मामला गत फरवरी में सामने आया था। जैसे ही बैंक में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका उजागर हुई, आरबीआई ने बैंक के वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद अपने जमा धन को लेकर परेशान खाताधारकों ने लगातार प्रदर्शन किए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भी विशेष जांच टीम गठित कर जांच शुरू की, जबकि आरबीआई ने फॉरेंसिक ऑडिट और फॉरेंसिक अकाउंटिंग जांच कराई। अब आरबीआई द्वारा वर्ष 2013-14, 2014-15 और 2015-16 की फॉरेंसिक अकाउंटिंग एंड इन्वेस्टिगेटिंग रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें बैंक में घोर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने बैंक के कंप्यूटर सिस्टम में गलत प्रविष्टियां दर्ज कीं।
लेजर खातों में हेरफेर कर धनराशि का गबन किया गया और कई खातों से रकम निकालकर निजी खातों में ट्रांसफर की गई। इसके अलावा बैंक के कैश बैलेंस को वास्तविक स्थिति से अलग दर्शाया गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बैंक के दैनिक खातों का सही मिलान नहीं किया गया। दिन समाप्ति के बाद लेखा प्रणाली को जानबूझकर प्रभावित किया गया ताकि गड़बड़ियां छिपाई जा सकें। फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के अनुसार यह पूरा खेल बैंक के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सिस्टम में तकनीकी छेड़छाड़ कर किया गया। इसमें बैंक अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। रिकॉर्ड को इस तरह बदला गया कि लंबे समय तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। पुलिस अधीक्षक सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि शाखा प्रबंधक रिंकू गौतम की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मामले में पूर्व सचिव आरके बंसल (अब दिवंगत), सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर इंजीनियर गणेश चंद्र वार्ष्णेय, तत्कालीन शाखा प्रबंधक महावीर सिंह, तत्कालीन शाखा प्रबंधक संजय गुप्ता और कार्यकारी शाखा प्रबंधक विजय मोहन भट्ट शामिल हैं। पुलिस और एसआईटी अब फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर साक्ष्य जुटाने में लगी है। सूत्रों के मुताबिक जांच आगे बढ़ने के साथ कई और कर्मचारियों की भूमिका सामने आ सकती है।