उत्तराखण्डः उपनल और वन विभाग कर्मियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त! सरकार से मांगा जवाब, नए अनुबंध पर जताई नाराजगी
नैनीताल। हाईकोर्ट ने उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ व वन विभाग में वर्षों से कार्यरत दैनिक श्रमिकों को कोर्ट के आदेशों के बावजूद अभी तक नियमित नहीं करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को कैबिनेट में रखा गया है, जिसपर निर्णय लेने के लिए उन्होंने कोर्ट से अतिरिक्त समय देने की मांग की है। इस पर न्यायालय ने कहा कि इस विषय पर अलग से समय दिया जाएगा। वहीं शासकीय अधिवक्ता द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय मांगा गया। मामले की अगली सुनवाई के लिए दो दिन बाद की तिथि नियत की गई है। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से प्रस्तुत एक अनुबंध पर भी न्यायालय ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि यह अनुबंध न्यायालय के आदेशों की अवमानना करता प्रतीत होता है। साथ ही न्यायालय ने शासन से यह भी पूछा कि न्यूनतम वेतनमान और जीएसटी कटौती रोकने जैसे स्पष्ट आदेशों के बावजूद नए अनुबंध की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। न्यायालय ने अनुबंध की एक आपत्तिजनक शर्त पर भी सवाल उठाए, जिसमें कर्मचारियों को नई नियुक्ति मानने का उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने टिप्पणी की, कि यदि ऐसा माना जाएगा तो कर्मचारियों का नियमितीकरण संभव ही नहीं हो पाएगा। बता दें कि संविदा कर्मचारी संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष उनका पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व में कोर्ट की खंडपीठ ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के सम्बंध में एक आदेश जारी किया था। लेकिन इस आदेश पर अब तक राज्य सरकार की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिया गया। न ही इसे उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड में लाया गया है। पूर्व में संघ की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस अवमानना याचिका पर (उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ बनाम आनन्द बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड) की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की गयी थी।