Oct 14, 2026 Login
Awaaz24x7-government

उत्तराखंड हाईकोर्ट न्यूज़:पुलिस की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराज़गी, एडवोकेट जनरल को कहा डीजीपी को निर्देश दे कि कोई भी केस हो पुलिस गंभीरता से मामले को दर्ज करें।

Uttarakhand High Court News: The High Court expressed strong displeasure over the functioning of the police, the court asked the Advocate General to instruct the DGP that in any case, the police shou

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस की लचर कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आम जनता अपनी समस्याओं को लेकर पुलिस के पास जाती है लेकिन पुलिस केस दर्ज नही करती जिसकी वजह से प्रतिदिन हाईकोर्ट में पांच-छः केस दायर किये जाते हैं, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल से कहा है कि वो डीजीपी को निर्देश दे कि पुलिस के पास जितनी भी शिकायतें आती है चाहे वह ज़मीन से संबंधित विवादों से जुड़ी हो या फिर सुरक्षा से सभी मामलों को पुलिस गंभीरता से ले और मामला दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करें।
दरअसल उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने हरिद्वार के एक मामले पर संज्ञान लेते हुए एसएसपी को निर्देश दिए है याचिकाकर्ता को सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी तेजिंदर जीत सिंह कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसे सुरक्षा दिलाने की प्रार्थना की है,याचिकाकर्ता का कहना था कि कैलाशनन्द स्वामी उनकी जमीन हड़पना चाहता है और उनसे उसे और उसकी संपति को खतरा है।याचिकाकर्ता की ओर से इस सम्बंध में 2019 में पुलिस से शिकायत की गई थी लेकिन उनकी शिकायत को पुलिस ने गंभीरता से नही लिया और कोई कार्यवाही नही की।याचिकाकर्ता ने ये भी कहा कि निचली अदालत में उनकी जमीन को बेचने या खुर्द बुर्द करने पर रोक लगाई थी बावजूद इसके विपक्ष ने उनकी जमीन बेच दी।कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए सरकार से पूछा कि इस मामले में क्या कार्यवाही की गई है।लेकिन सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नही मिला जिसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस के उदासीन रवैये पर सख्त नाराज़गी व्यक्त की साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता के उस संदेश पर भी कड़ी नाराजगी जताई जिसमे उसने पुलिस की ओर से कार्यवाही न होने पर कोर्ट परिसर में आत्मदाह करने की धमकी दी।कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी सख्त हिदायत दी कि यदि ऐसी धमकी या ऐसी हरकत दोबारा की तो कोर्ट उसके खिलाफ भी अवमानना की कार्यवाही करेगी,इसके बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट से मांफी भी मांगी।