उत्तराखंड हाईकोर्ट न्यूज:चारधाम यात्रा में 600 घोड़ों की मौत का दावा,कोर्ट ने सरकार से निगरानी कमेटी पर मांगा जवाब
देहरादून।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं और लगातार हो रही घोड़ों की मौत के मुद्दे पर दायर जनहित याचिकाओं पर गंभीर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से पूछा कि पशुओं के लिए बनाई गई नियमावली और एसओपी को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए क्या किसी निगरानी समिति का गठन किया जा सकता है।
न्यायालय ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि जिन-जिन तीर्थ स्थलों पर घोड़ों और खच्चरों का उपयोग किया जाता है, उनकी विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तिथि निर्धारित की गई है।
बता दें समाजसेवी और पशु प्रेमी गौरी मौलखी ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दावा किया है कि चारधाम यात्रा के दौरान अब तक लगभग 600 घोड़ों की मौत हो चुकी है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा पशुओं की सुरक्षा के लिए जो मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई गई है, उसका जमीनी स्तर पर सही ढंग से पालन नहीं हो रहा।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित की जाए, जो यात्रा मार्गों पर पशुओं और तीर्थयात्रियों दोनों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और भोजन-आवास की व्यवस्था की निगरानी करे। साथ ही यह भी कहा गया है कि यात्रा में लगातार बढ़ती भीड़ के कारण न केवल श्रद्धालुओं बल्कि घोड़ों और खच्चरों को भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया है कि चारधाम यात्रा में ‘कैरिंग (carrying capacity कैपेसिटी’ के अनुसार ही श्रद्धालुओं और पशुओं को अनुमति दी जाए, ताकि पशुओं पर हो रहे कथित अत्याचार को रोका जा सके और यात्रा को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाया जा सके।