भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते पर मुहर: भारतीय निर्यातकों की चमकेगी किस्मत, 5 अरब डॉलर तक पहुंचेगा कारोबार

India-New Zealand Trade Agreement Sealed: Indian Exporters' Fortunes Set to Soar; Trade to Reach $5 Billion

नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के व्यापारिक संबंधों में सोमवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। पिछले साल दिसंबर में बातचीत के सफल समापन के बाद, दोनों देश औपचारिक रूप से मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक नजदीकी बढ़ाएगा, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भारतीय बाजार के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा।

इस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य अगले पांच वर्षों के भीतर द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान स्तर से दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों की पूरक अर्थव्यवस्थाओं का लाभ उठाने के लिए तैयार किया गया है। जहां भारत को तकनीक और डेयरी क्षेत्र में विशेषज्ञता का लाभ मिल सकता है, वहीं न्यूजीलैंड के लिए भारत एक विशाल उपभोक्ता बाजार पेश करता है। इस एफटीए का सबसे क्रांतिकारी पहलू भारतीय निर्यातकों को मिलने वाली कर छूट है। समझौते के लागू होते ही न्यूजीलैंड जाने वाले करीब 70 फीसदी भारतीय उत्पादों पर शून्य सीमा शुल्क लगेगा। इससे कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, और इंजीनियरिंग सामान जैसे क्षेत्रों से जुड़े भारतीय व्यापारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में जबरदस्त प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी। 22 दिसंबर को बातचीत पूरी होने के लगभग चार महीने बाद हो रहे इन हस्ताक्षरों को विशेषज्ञों ने 'गेम चेंजर' बताया है। भारतीय उत्पादों के लिए विदेशी बाजार में राह आसान होने से न केवल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा, बल्कि देश के भीतर विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सोमवार को होने वाले इस हस्ताक्षर समारोह पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत का एक और सशक्त प्रमाण है।